Tuesday, May 31, 2016

भूल गए हम दोहे,चौपाइयां और छन्द !! - पीतांबर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न. - +9414657511

वो भी क्या ज़माना था जब हर दसवां भारतवासी अपनी आम बात में भी कोई न कोई कविता का प्रकार प्रयोग किया करता था !हमारे कवि लोग भी इनका भरपूर प्रयोग अपनी कविताएं गढ़ने में किया करते थे ! फिर भारत में अंग्रेज़ आये,मुसलमान आये तो कुछ लोग बहुत ही बढ़िया शेयर और ग़ज़ल कहने लगे ! जो दिल के पार हो जाय करती थीं ! 1980 तलक किसी बुरे शब्द का प्रयोग शायद ही की शायर,गीतकार या ग़ज़ल के लिखने वाले ने किया हो !
              लेकिन आज हालात ये हैं कि कवि हो या शायर,ग़ज़लकार हो या कोई गीतकार ,मशहूर होने के लिए वो द्विअर्थी शब्दों या गंदे शब्दों का प्रयोग करने को सफलता का आसान रास्ता मानता है ! आज कल कई चैनलों पर जो कॉमेडी शो दिखाए जा रहे हैं वो तो फूहड़ता की हद ही पार करते नज़र आते हैं !अभी कलर चैनल के कॉमेडी शो में कृष्णा ने राम गोपाल वर्मा को "नल्ला-अवार्ड"देने की कोशिश की , तो उनकी आँखों का गुस्सा देख कर मीका सिंह ने मौका सम्भाल लिया !वरना कुछ भी हो सकता था !
                  "AIB "नामक हास्य वीडिओ में "तन्मय भट्ट नामक कथित हास्य कलाकार ने अपनी "गन्दी-कला" का प्रदर्शन करते हुए लता जी और सचिन जी पर अभद्र बातें और गालियां कहीं जिन्हें कतई सही नहीं कहा जा सकता !टीवी चैनल वाले भी ऐसे गम्भीर मामलों पर चर्चा करते समय निम्न स्तर के "विशेषज्ञ"जानबूझ कर बुलाते हैं जैसे वो भी गंदगी फैलाना चाहते हों !दर्शक भी अब अच्छी तरह से समझने लगे हैं कि कौन सा विशेषज्ञ क्या बोलेगा !
                    क्या ये सब किसी षड्यंत्र का हिस्सा हैं ?कौन हैं वो लोग जो फ़िल्मी सितारों ,लेखकों,कवियों गीतकारों और विज्ञापनों द्वारा देश की महान संस्कृति को नष्ट करवाना चाहते हैं !देश की सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे सभी मामलों की गहनता से जांच करनी चाहिए !अच्छे कवियों को गंदे कवियों का सन्मान नहीं करना चाहिए !गंदे फ़िल्मी सितारों की फिल्में नहीं देखनी चाहिए !टीवी कार्यक्रमों का भी सरकारी सेंसर-बोर्ड होना चाहिए !
                 जय - हिन्द !! जय - भारत !!
 "5th पिल्लर करप्शन किल्लर"वो ब्लॉग जिसे आप रोज़ाना पढ़ना,बाँटना और अपने अमूल्य कॉमेंट्स देना चाहेंगे !





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