Tuesday, May 23, 2017

"सेक्स"और विनाशकारी अज्ञानता !- पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतंत्र -टिप्पणीकार)

  समय-समय पर भारत में "सेक्स की अज्ञानता" एक विनाशकारी दुर्घटना का कारण बनती है !भारतीय सभ्यता-संस्कृति ने "कोक-शास्त्र"नामक ग्रन्थ दिया ! दूसरी कथाएं भी यही बतातीं हैं कि माँ पार्वती से लेकर चाहे सीता जी हों या राधा-मीरां जी हों !मध्यकाल की कोई राजकुमारी हों या फिर मुग़ल शासन काल की कोई राजपूतानी ! सभी ने अपने मन चाहे मर्द से पहले प्यार किया ,फिर इज़हार किया और फिर शादी करके सेक्स किया और अपना परिवार भारतीय संस्कृति के अनुसार चलाया !समाज और परिवारों ने इसका विरोध भी किया और परिस्थिति अनुसार समर्थन भी !ऋषियों-मुनियों ने भारतीय परम्पराओं को इस प्रकार से बुना ,जिससे सभी काम भी हो जाएँ और समाज में "अराजकता" भी नहीं फैले !शरीर की इच्छाओं को "मन-दिमाग और दिल"में बाँट दिया !"पाप और पुण्य"का बार्डर बनाया!"रीती-रिवाज़ों"की गूंद बनाकर मनुष्य के साथ ऐसे चिपका दिया ,जो समय बीतने के साथ और ज्यादा मजबूत होता गया !खुले सेक्स को गन्दा बताया गया !कोई दुर्घटना हो भी जाये तो उसे जनहित में छिपाना भी बेहतर इलाज समझा गया !मिलीजुली क्रियाओं-प्रतिक्रियाओं"के साथ सभी भारतीय रह रहे थे !
                       लेकिन तभी यहां मुगल और अँगरेज़ आये जिनकी सभ्यतानुसार महिलाएं केवल एक सेक्स मशीन थीं !कोई भी किसी भी महिला या बच्ची-बूढी को अपनी हवस का शिकार बना लेता था ! चाहे उस बेचारी महिला की "इच्छा"हो या ना हो !ये लोग "शौंकिया - सेक्स"करने के आदि थे ! मुगलों और अंग्रेज़ों के नजदीक रहने वाले उनके "झंडा-बरदार"दरबारी लोग अपने "मालिकों"की सेवा में नयी-नयी औरतों को बहला-फुसला कर ले जाते और पेश करते रहे !नाच के नाम पर या फिर मुजरे के नाम पर वैश्यालय खुलने लग गए !धनि लोगों और उनके चमचों का ये शुगल बन गया ! और सेक्स बदनाम और गंदा हो गया ! माताएं अपनी बच्चियों को इस से दूर रहने का कहने लगीं !नए नए रिवाज़ और कहावतें गढ़ी गयीं  !
                              लेकिन "दलाल और चमचे"लोग "तू डाल-डाल ,तो मैं पात-पात"वाली कहावत अनुसार नित नए तरीके निकालने लगे !इन लोगों ने अंग्रेज़ों के जाने के बाद "काले-अंग्रेज़ों"की "सेवा"करनी शुरू कर दी !ऐसे कार्यों में महिलाएं भी प्रमुखता से रोल निभातीं थीं !जैसे वैश्यालयों की "महारानी"बनना आदि आदि ! भारत के हर बड़े शहरों में सेक्स के बाजार खुल गए ,जो आज भी हैं !छोटे शहरों में लुकाछिपी से ये काम हो रहा है !ऐसे लोगों ने "आधुनिकता के नाम पे महिलाओं को मुर्ख बनाना शुरू किया !पहले कहते कि औरत को "बेड़ियों"में बाँध रख्खा है !फिर अन्धविश्वास का ढोल बजाकर गाँव के विद्वानों को मूर्ख बताया गया !उसे घर से बाहर निकाल कर पैसे के जाल से फांसा गया दफ्तरों के मैनेजरों बाबुओं द्वारा ! फिर अन्याय का ढिंढोरा पिता जाने लगा !यानी जो लोग महिलाओं की इज्जत लुटवाने का षड्यंत्र रचते हैं उन्हीं के गैंग के आदमी महिलाओं के अधिकारों हेतु झूठा लड़ते भी हैं !हद्द है !
                     और भारतीय समाज ना तो भारतीय रहा और नाही वो अँगरेज़ बन पाया ! आज हालात ये हैं कि ज्यादा तर महिलाएं सेक्स करने के लिए अपने पति को भी जल्दी से इजाजत नहीं देतीं ! सो बहाने बनातीं हैं !आधुनिक होने के बावजूद वो आज भी नहीं समझ पायी कि सेक्स वैसा ही है जैसे "देसी गहि लगा आलू का परांठा"!!जो पेट भरने के बाद भी स्वाद लगता है !हर दुसरे दिन खाने को जी करता है !और खाते रहने में कोई हर्ज़ भी नहीं है !जब भी जी चाहे जिस किसी के भी साथ मन चाहे सेक्स करने को तो कर लेना चाहिए !
               लेकिन - लेकिन - लेकिन !!!!! अगर कोई एक पक्ष अगर "ना" कर दे तो !!!--------फिर चाहे किसी पक्ष का कितना भी मन कर रहा हो ! कितना भी सुहाना मौसम हो !कितनी भी अच्छी-अनुकूल परिस्थितियां हों !!!!उसे दूर हट जाना चाहिए !! जबरदस्ती करने वाले को "फांसी" ही लगनी चाहिए !ऐसा मेरा मानना है ! और मैं चाहता हूँ कि मेरे पाठक मित्र इस विषय पर खुलकर अपने विचार रख्खें ! समाज में चर्चाएं चलाएं !इंटरनेट माध्यमों का भरपूर प्रयोग करके इस गंभीर विषय पर बहस करके कोई निष्कर्ष निकला जाना चाहिए !जैसे 3 तलाक पर निकलने की संभावना बनी हैं ! 



प्रिय "5TH पिल्लर करप्शन किल्लर"नामक ब्लॉग के पाठक मित्रो !सादर प्यारभरा नमस्कार वो ब्लॉग जिसे आप रोजाना पढना,शेयर करना और कोमेंट करना चाहेंगे !
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                         मैं बड़े ही गर्व के साथ कह सकता हूँ की मेरे ब्लॉग को माननीय प्रधानमंत्री श्री मान नरेंद्र मोदी जी और माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा श्री मान अमित शाह जी भी पढ़ते हैं !उन्होंने मुझे ट्वीट भी किये हैं ! कई बड़े लेखक और लेखिकाएं,कवी-कवित्रियाँ और स्वतंत्र टिप्पणीकार आदि भी जुड़े हैं जिससे मैं अपने आपको गौरवान्वित समझता हूँ !आशा करता हूँ की आप सबका मुझे और ज्यादा साथ मिलेगा ! फिर मैं बारी बारी से आप सबके शहरों में आकर मिलूंगा !आपसे और ज्यादा सीखूंगा !
                           आप सबसे अनुरोध है कि आप मुझे अपने अनमोल सुझाव देते रहा करें !
                               सधन्यवाद !
                                                  आपका अपना ,
                                                   पीताम्बर दत्त शर्मा,
                                                     सूरतगढ़ !

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