Friday, May 5, 2017

"वो एक तालियों वाला फैसला"!! - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतंत्र-टिप्पणीकार)

आज वो फैसला आ गया ,जिसे सब सुनना चाहते थे !बड़ी दुःखदायी और अप्रत्याशित घटना थी वो "निर्भया-काण्ड"!ऐसा नहीं था कि कोई पहली बार बलात्कार की शिकार लड़की की मृत्यू हुयी थी वो !ऐसा भी नहीं था कि भारत में कोई पहला "घृणित गैंग-रेप"हुआ था !लेकिन वो वहशियाना कार्य था !जिसकी जितनी निंदा की जाए उतनी कम ,और ऐसे घृणित कार्य की जितनी सज़ा दी जाए उतनी कम है !तो क्या "फांसी" से बड़ी कोई सज़ा नहीं होती इस विश्व में?अगर होती हैं तो वो सजाएँ हमारे संविधान में क्यों नहीं हैं ?तालिबानियों ने अनेक प्रकार की सज़ाएं विश्व को दे के दिखायीं हैं जिन्हें देखकर ही तो विश्व के मुस्लिम नौजवान ऐसे संगठनों के साथ जुड़ते जा रहे हैं !उनको "मौत"अच्छी लगने लगी है !और आजकल हम भारतियों को भी देखा-देखि मौतें देखना अच्छा लगने लगा है !ये मैं सब किसी ब्राह्मण अपराधी को छुड़वाने हेतु नहीं लिख रहा हूँ !जबकि एक मुस्लिम लड़के को "नाबालिग"बताकर छोड़ दिया गया है !
                                क्या ये फांसी केवल उन्हीं लड़कों को ही लगेगी ?निस्संदेह ,उन बदमाशों के परिवार वालों को भी सज़ा मिलेगी !क्योंकि उन्होंने अपने लड़कों को वो "संस्कार"नहीं सिखाये जो सिखाये जाने चाहिए थे !लेकिन क्या इस फैसले पर तालियां बजनी चाहिए थीं ? क्या टीवी एंकरों को निर्भया की माता जी से ऐसे सवाल पूछने चाहिए थे जैसे वो पूछ रहे थे !एक विशेष तरह का "इवेंट"दिखाया जा रहा था !जैसे ही फांसी की सज़ा का फैसला आया ,वैसे ही महिला एंकर इतनी खुश नज़र आयी जैसे कोई "खुशखबरी"आयी हो ?ऐसा लगने लगा शाम के 5 बजे तलक जैसे आज ही निर्भया की माता किसी प्रदेश की मुख्यमंत्री बन जाएंगी !और देश के सारे पुरुष अब घरों के अंदर रहेंगे और महिलाएं बाहर !
                         ऐसे हालातों में तो मेरे मन मस्तिष्क में एक साथ कई प्रश्न दौड़ गए ! क्या होगा इस देश का भविष्य सेक्स के मामले में ?क्या हमारा संविधान "प्राकृतिक-संविधान"में अपनी टांग अड़ा रहा है आजकल ?क्या पुरषों को अब सेक्स करना छोड़ देना चाहिए !क्योंकि हमारे संविधान के मुताबिक पत्नी भी सुबह जाकर अदालत में ब्यान देदे कि मेरे पति ने "जबरदस्ती-सेक्स"किया है और घृणित तरीके से किया है तो अगला तो टांग दिया जाएगा ना !जैसा पहले कहते थे ना कि "आदमी को अपने लंगोट का अवश्य पक्का होना चाहिए "!लेकिन हमारे देश के "पढ़े-लिखे बुद्धिजीवियों"ने अंग्रेज़ों की नक़ल करना सिखाया ,फिर जब छोरे अँगरेज़ बनकर खुले में और दिनरात सेक्स का ही सोचने लगे तो"नॉन-एजुकेटिड"लडकियां बीवियां ऐसे पवित्र कार्य करने हेतु तैयार ही नहीं होतीं !तो पुरुष क्या करे ?हम ऊपर से तो अँगरेज़ बन गए , लेकिन अंदर से हिंदुत्व की जीवन शैली से ही जीना चाहते हैं !कांग्रेस और वामपंथियों ने पिछले 60 साल जो शासन किया, उसमें भारतियों को सेक्सी बनाने का काम भी बहुतायत में किया था !लेकिन ये आरएसएस वाले समझते ही नहीं !
                               मैं तो कहता हूँ कि अब पुरषों को अपनी पत्नियों के साथ भी सेक्स तभी करना चाहिए जब वो तहसील जाकर पहले स्टाम्प पेपर पर सहमति हेतु हस्ताक्षर ना करदे !अन्यथा फांसी तैयार है !तभी तो मुलायम जी ने कहा था कि "लड़के हैं ,गलती हो जाती है ,तो क्या फांसी पर टाँगोगे"?लो जी मुलायम जी !सर्वोच्च-न्यायालय ने टांग दिए पांच लड़के छठे को छोड़ दिया !जिन्होंने मन्नतें मांग कर भगवान से लड़के लिए थे ,वो भी जीतेजी लटक जाएंगे !बजाओ तालियां !सेक्स के बारे में पूरा पढ़ाया जाना चाहिए !इसे सरदर्द नहीं मनोरंजन का एक तरीका समझना चाहिए जिसे हम कई तरीकों से कर सकते हैं !और खुश रह सकते हैं !जिसे जानवर खुश रहते हैं !अगर अंग्रेज़ ही बनना है ,फैशन ही करना है तो युवा कन्याओ "सरप्राईज़-सेक्स" का आनद लेना भी सीखो !चाचा नेहरू,महात्मा गांधी,सहित कई नेताओं ने यही तो सिखाया है देश को !
         जय हिन्द ! जय भारत !


प्रिय "5TH पिल्लर करप्शन किल्लर"नामक ब्लॉग के पाठक मित्रो !सादर प्यारभरा %!आप मेरा साथ पिछले 7 वर्षों से दे रहे हैं !मैं आपका हृदय से आभारी हूँ !आपने ना केवल मेरे और मेरे मित्रों के लेखों को पढ़ा,बल्कि उसे अपने मित्रों संग शेयर भी किया ,पसंद किया और उस पर जाकर कॉमेंट भी लिखे ! जो मेरे लिए ना केवल अनमोल थे , साथ ही साथ मेरे लिए वो प्रेरणादायी भी थे !कई मित्रों ने तो मेरा ब्लॉग ज्वाइन भी किया है !कई समाचार पत्रों-पत्रिकाओं ने मेरे लेख प्रकाशित भी किये ! उनका भी मैं आभारी हूँ !आप सबकी इस अनुकम्पा से ही आज मेरे पाठकों की संख्या अगर मैं सभी माध्यमों की जोड़ दूँ तो तक़रीबन दस लाख(१०,०००००. )बनती है !क्योंकि ब्लॉग पर लिखी सामग्री गूगल+,ट्वीटर,फेसबुक और उसके कई ग्रुपों के साथ साथ मेरे पेज पर भी डाली जाती है !
                         मैं बड़े ही गर्व के साथ कह सकता हूँ की मेरे ब्लॉग को माननीय प्रधानमंत्री श्री मान नरेंद्र मोदी जी और माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा श्री मान अमित शाह जी भी पढ़ते हैं !उन्होंने मुझे ट्वीट भी किये हैं ! कई बड़े लेखक और लेखिकाएं,कवी-कवित्रियाँ और स्वतंत्र टिप्पणीकार आदि भी जुड़े हैं जिससे मैं अपने आपको गौरवान्वित समझता हूँ !आशा करता हूँ की आप सबका मुझे और ज्यादा साथ मिलेगा ! फिर मैं बारी बारी से आप सबके शहरों में आकर मिलूंगा !आपसे और ज्यादा सीखूंगा !
                           आप सबसे अनुरोध है कि आप मुझे अपने अनमोल सुझाव देते रहा करें !
                               सधन्यवाद !
                                                  आपका अपना ,
                                                   पीताम्बर दत्त शर्मा,
                                                     सूरतगढ़ !

"5th पिल्लर करप्शन किल्लर", "लेखक-विश्लेषक एवं स्वतंत्र टिप्प्न्नीकार", पीताम्बर दत्त शर्मा ! 
वो ब्लॉग जिसे आप रोजाना पढना,शेयर करना और कोमेंट करना चाहेंगे !
 link -www.pitamberduttsharma.blogspot.com मोबाईल न. + 9414657511.
 इंटरनेट कोड में ये है लिंक :- https://t.co/iCtIR8iZMX.
 "5th pillar corruption killer" नामक ब्लॉग अगर आप रोज़ पढ़ेंगे,उसपर कॉमेंट करेंगे और अपने मित्रों को शेयर करेंगे !तो आनंद आएगा !मेरा इ मेल ये है -: "pitamberdutt.sharma@gmail.com.

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (07-05-2017) को
    "आहत मन" (चर्चा अंक-2628)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

    ReplyDelete
  2. यह भी एक नज़रिया

    ReplyDelete

"मीडिया"जो आजकल अपनी बुद्धि से नहीं चलता ? - पीताम्बर दत्त शर्मा {लेखक-विश्लेषक}

किसी ज़माने में पत्रकारों को "ब्राह्मण"का दर्ज़ा दिया जाता था और उनके कार्य को "ब्रह्मणत्व"का ! क्योंकि इनके कार्य समाज,द...