Saturday, October 8, 2011

" चेतना " कंहा जगाई जाएगी ? कंहा जगानी चाहिए ??? ?

 चेतन अवस्था में रहने वाले दोस्तों , नमस्कार ! लो जी सर्व श्री बाबा रामदेव , अन्ना हजारे , लाल  कृषण और छोटे मुलायम जी सभी " चेतना ", क्रांति " और जागरूकता रथ लेकर चल पड़े हैं  या चलने वाले हैं | जब किसी  विधान - सभा या लोकसभा का किसी को उमीदवार बनाना होता है  तब तो ये प्रादेशिक और केंद्रीय नेता ,जाती,धरम,पैसा और इलाका देख  कर टिकट बांटते हैं ? कार्यकर्ताओं और जनता को कोई नहीं पूछता  ?? कार्यकर्ताओं से लिये गए  चंदे को इन नेताओं ने कंहा खर्च कर दिया, कोई  नहीं बताता ?? ऊपर से आर्डर कर  देते  हैं  की प्रदर्शन कर दो , धरना  दे दो,वगेरह - वगेरह ,परन्तु बज़ट कोई नहीं भेजते ?? प्रदेश और केंद्र में  बसें भर कर कार्यकर्त्ता भेज दो ---?? पर कैसे, कंहा से भेजे कोई ?? सफाई  ऊपर से करो  ...... नीचे वाले अपने आप सुधर  जायेंगे ??? साधारण  जीवन  ,  उच्च विचार , त्याग की भावना , और देश भक्ति किसी भी पार्टी के बड़े लीडर में दिखाई ही नहीं देती | अफसर , पत्रकार , वकील और पुलिस सब " सभी  - चोर - हैं " बोलकर चोरी कर रहे हैं  ?? अध्यापक  , कवि और जज कुछ ठीक हैं | सेना  को तो कोई पूछता ही नहीं कि  क्या हो रहा है ? कार्यकर्त्ता तो हमेशा अपने बड़े नेता का स्वागत करता है , तन - मन - धन लगा देता है | निश्ठापूर्वक पार्टी के पदाधिकारियों के आदेश मानता है ? २० से ३० साल  गुज़र जाते हैं तब समझ  में आता है कि हमें तो मूर्ख बनाया जा रहा था ?? कभी किसी चोर,ठग ,कमीने और चालबाज़ को पार्टी का अध्यक्ष बना दिया जाता है ,तो कभी किसी पार्टी से बगावत करने वाले गिरोह बाज़ को ???? शरीफ , इमानदार और सिधान्तवादी सारी उम्र तालियाँ बजाते और माला पहनाते ही मर जाते हैं ????? ये सभी पार्टियों कि अंदरूनी कहानी है और भारतीय जनता पार्टी इस रोग से बुरी  तरह से ग्रसित है ?? क्या नगर और देहात मंडल , क्या जिला ,प्रदेश और केंद्र सब जगह छीना - झपटी चलती दिख रही है ???? जो कार्यशैली और इच्छाशक्ति दिखनी चाहिए किसी नेता में वो किसी भी  नेता में दूर - दूर तक नज़र नहीं आती ?? थोड़ी सी अन्ना जी और मोदी जी में दिखाई पड़ती है तो बाकी नेता उन्हें आगे नहीं आने देते बल्कि उन्हें चेल्लेंज करते हैं कि हिम्मत है तो २०१४ के चुनाव लड़ लो ?? अरे एक बार वैसे ही कुछ समय के लिए सरकार चलने की पावर किसी   ऐसे आदमी को देदो ?? या सारे नेताओं के बोम्ब फिट करके  नेहरु स्टेडियम में अफसरों के साथ बिठा दिया जाए और कह दिया जाए की अब आपको तभी छोड़ा जायेगा जब आप देश हित के सभी सर्वेक्षण , जांच , संशोधन और निर्णय नहीं कर लेते ??? सभी प्रदेशिक नेता अफसर भी साथ में बिठाए जाएँ लागु करवाने हेतु  ??   तब तो कोई उम्मीद है की देश का भला हो जायेगा अन्यथा बहन मायावती के अनुसार " एक नागनाथ तो दूसरा सांप नाथ " में   से ही किसी एक को  चुनना होगा ??  जय - श्री -  राम -  बोलना पड़ेगा ...... जय श्री राम !!      

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