Wednesday, July 29, 2015

" ख़ाक " जो आज ख़ाक में मिलेगी !! - पीताम्बर दत्त शर्मा ( लेखक-विश्लेषक ) मो. न. - 9414657511


                *मुंबई बम ब्लास्ट के गुनहगार याकूब मेमन को गुरुवार को 6.30 मिनट पर नागपुर जेल में फांसी दे दी गई। याकूब की फांसी के दौरान उसके परिवार के लोग भी जेल परिसर में मौजूद थे। जेल अधीक्षक सहित 6 अधिकारियों की मौजूदगी में फांसी दी गई।पोस्टमार्टम के बाद उसका शव उसके परिवार को सौंप दिया जाएगा। *याकूब के शव का पोस्टमार्टम शुरु* जेल प्रशासन ने सुबह 7 बजकर 1 मिनट पर उसे मृत घोषित किया। इसके साथ याकूब के शव का पोस्टमार्टम शुरु कर दिया। *जन्मदिन के दिन ही मौत* ये भी अजीब संयोग की है कि आज ही के दिन याकूब का जन्म हुआ था और आज ही के दिन उसे मौत मिली। आज याकूब का 53 वां जन्मदिन है। आज उसे वहीँ दफनाया जायेगा जहां उसके बुज़ुर्गवार दफनाएं गए हैं !

                                  जैसे कोई बच्चा गलत संगत में आकर बुरा आदि बनता है बिलकुल वैसे ही कोई अच्छा आदमी बुरे नेताओं के भाषणों को सुन-सुन कर बुरा आदमी बन जाता है ! इन बुरे राजनेताओं ने ही सेकुलरिज़्म,कोम्युनलिज़्म ,समाजवाडिज़्म और माओवादिज़्म नामक शब्द दिए हैं इस देश को ! इस काम में पत्रकारों ने भी अहम भूमिका निभायी है ! कॉंग्रेस्स का काम तो बांटो और राज करो ही है जो उन्होंने अपने आका अंग्रेज़ों से बाखूबी सीखा है ! उनके आधे नेता कुछ बोल रहे हैं और आधे नेता कुछ और ही बकवास किये जा रहे हैं ! कोई  नहीं है ऐसे दीमक प्रजाति को !इसके साथ-साथ मैं ये भी बता दूँ कि कई लोग आज टीवी चैनलों पर , फेसबुक आदि पर बड़े देश-भक्त बनते भी नज़र आएंगे ! वो भी इस देश की तरक्की में उतने ही दोषी हैं जितने ये बुरे लोग !

                                     दूसरी तरफ वो शख्स सुपुर्दे ख़ाक आज ही रामेश्वरम में होगा जो हमारा प्यारा था ! जब वो एक वैज्ञानिक  और जब वो हमारे प्रिय महामहिम राष्ट्रपति बने तब भी ! जब उन्होंने छात्रों को पढ़ाया तब भी और जब उन्होंने परमाणु विस्फोट किया तब भी हमें प्यारा था !    डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम। उनकी बात मानने का मन करता था। उनसे वादे करने का जी चाहता था। उनके साथ शपथ लेने को दिल करता था। इस साल जब जनवरी माह में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में पधारे तो वहां का जर्रा-जर्रा कलाम-कलाम पुकार रहा था। सारे रास्ते वहीँ जा रहे थे जहाँ वे बोलने वाले थे।  हजारों बच्चों ने उनके साथ शपथ ली कि वे जिसे भी वोट देंगे उससे पहले उसके काम की गणना करेंगे। उन्होंने वहां मौजूद सबसे दोहराने के लिए कहा कि यदि दिल में सुंदर चरित्र बसता है तो घर में सौहार्द्र होता है और जो घर में साौहाद्र्र होता है तो देश व्यवस्थित होता है और जब देश व्यवस्थित होता है तो दुनिया में शांति स्थापित होती है।
  लेकिन हमने ये क्या किया देश के सबसे कर्मठ व्यक्ति के देह त्यागते ही स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी। सोमवार रात ही बच्चों के स्कू ल से मोबाइल पर मैसेज आ गया कि पूर्व राष्ट्रपति के दुखद निधन पर स्कूल में अगले दिन अवकाश रहेगा और परीक्षा उसके अगले दिन होगी जबकि बच्चों के कलाम चाचा कहते थे कि मेरी मृत्यु पर अवकाश घोषित मत करना। अगर तुम मुझसे प्यार करते हो तो एक दिन ज्यादा काम करना। हमारे विद्यालयों ने जाहिर कर दिया है कि वेे केवल शख्स का सम्मान करते हैं शख्सियत का नहीं।
       जयपुर में  'विजन २०-२०'  के बारे में बात करते हुए उन्होंने पूछा - ''बच्चो क्या तुम बता सकते हो कि महाभारत का मेरा प्रिय पात्र कौनसा है? बच्चों ने कहा अर्जुन फिर युधिष्ठिर फिर भीम...कलाम चाचा नो-नो कहते गए और फिर बोले विदुर क्योंकि वे निर्भय, निष्पक्ष और निर्लिप्त थे। उन्होंने बच्चों से बुलवाया कि अगर हर भारतीय एक बेहतर नागरिक होगा तो दुनिया को एक अरब बेहतर नागरिक मिलेंगे। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा अगर रोजगारोन्मुख होगी तो 2020  तक हर भारतीय के पास काम होगा।
   कलाम साहब की रुखसती से हर आंख नम और सर सजदे में है। जैसे हर एक को तलाश है एक ऐसे कंधे कि जहां आंखें बरस सकें। वैसे ऐसा प्रस्थान किसी का भी ख्वाब हो सकता है। यह महादेशभक्त का महाप्रयाण है। जिंदगी भर जिस काम को लक्ष्य मानकर पूरा करने में लगे रहे उसी के साथ इस लिविंग प्लानेट यानी  पृथ्वी को अलविदा कहा। यह क्या कम है कि अपने महाप्रयाण से उन्होंने आतंकवादियों की गोलियों की भयावह गूंज को कम कर दिया। सुबह से भारत जिस दहशत को जी रहा था, देर शाम इस पर कलाम साहब का नजरिया छाने लगा। आतंक हार गया। देशभक्ति, मानवता की जीत हुई। आखों की नमी में शहादत के रंग इंद्रधनुष की तरह नजर आने लगे। बरगद-सी सोच ऐसा ही आभा-मंडल रचती है। हैरान हो सकते हैं कि कोई इतनों का इतना प्रिय कैसे हो सकता है। इतने सादा अंदाज में रहने वाली असाधारण आत्मा को कोटि-कोटि प्रणाम।
                      किसे जन्नत मिलेगी किसे दोज़ख !! ये तो उस खुदा को फैसला करना है ! मैं किसी के पक्ष में कोई "पटिशन" नहीं लगाउँगा खुदा के सामने क्योंकि मुझे उस पर विश्वास है कि वो दोनों में से एक को ही ज़न्नत भेजेगा ! विश्वास बड़ी चीज़ है ! क्यों आज विश्वास को कमज़ोर किया जा रहा है ??आप बताइये मित्रो !! ऐसे लोगों को क्या सज़ा दी जाए !आप ही बताएं अगर हमारी कोई व्यवस्था खराब भी हो गयी है तो उचित जगह और उचित समय पर ये लोग उसे क्यों नहीं उठाते ??
                              ये आज़ादी नहीं , अतिक्रमण है जनाब !! इनको  बाँधा जाना  आवश्यक है " !!
                                मित्रो !!"5TH PILLAR CORRUPTION KILLER",नामक ब्लॉग रोज़ाना अवश्य पढ़ें,जिसका लिंक -www.pitamberduttsharma.blogspot.com. है !इसे अपने मित्रों संग शेयर करें और अपने अनमोल विचार भी हमें अवश्य लिख कर भेजें !इसकी सामग्री आपको फेसबुक,गूगल+,पेज और कई ग्रुप्स में भी मिल जाएगी !इसे आप एक समाचार पत्र की तरह से ही पढ़ें !हमारी इ-मेल ईद ये है - pitamberdutt.sharma@gmail.com. f.b.id.-www.facebook.com/pitamberduttsharma.7 . आप का जीवन खुशियों से भरा रहे !इस ख़ुशी के अवसर पर आपको हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !!
आपका अपना - पीताम्बर दत्त शर्मा -(लेखक-विश्लेषक), मोबाईल नंबर - 9414657511 , सूरतगढ़,पिनकोड -335804 ,जिला श्री गंगानगर , राजस्थान ,भारत !






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"कुछ नहीं ,है भाता ,जब रोग ये लग जाता".....!!! - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतंत्र टिप्पणीकार) मो.न.+ 9414657511

वैसे तो मित्रो,! सभी रोग बुरे होते हैं !लेकिन कुछ रोग तो हमारा पीछा छोड़ देते हैं और कुछ आदमी की मौत तलक साथ देते हैं !पुराने जमाने में ऐसे ...