चाह नहीं मुझे कि मैं घोटालों पर लिखता जाऊं ! ..............!!! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 9414657511

भारत के प्रसिद्ध कवि श्री माखन लाल चतुर्वेदी जी की वो प्यारी सी कविता याद आ गयी जिसमें वो एक पुष्प की अभिलाषा को जाहिर करते हैं ! बचपन में भी पढ़कर ऐसा लगता था जैसे उन्होंने सच में पुष्प के मन की बात ही लिख दी हो !
                     

पुष्प की अभिलाषा  - माखनलाल चतुर्वेदी 

चाह नहीं मैं सुरबाला के
गहनों में गूँथा जाऊँ,

चाह नहीं प्रेमी-माला में
बिंध प्यारी को ललचाऊँ,

चाह नहीं, सम्राटों के शव
पर, हे हरि, डाला जाऊँ

चाह नहीं, देवों के शिर पर,
चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ!

मुझे तोड़ लेना वनमाली!
उस पथ पर देना तुम फेंक,

मातृभूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पथ जावें वीर अनेक।
                     ठीक उसी तरह आज जब मैं अपना लेख लिखने बैठा हूँ तो विश्वास कीजिये मुझे घण्टों तलक अपनी "चाह" का ही पता नहीं चला कि मैं किस विषय पर अपने विचार आपके साथ सांझे करुं  ??
आज कल "व्यापम" की बहुत चर्चा है ! इस से पहले ना जाने कितने घोटाले हो चुके हैं , इन सब पर ना जाने कितनी बार कितनों के द्वारा लिखा जा चुका है ! इसलिए इस विषय पर भी लिखने की "चाह"नहीं हो रही है जी !क्योंकि पैसे के बल पर ना जाने कितने लोग डाक्टरी की पढ़ाई पढ़ने हेतु पुरे देश में प्रवेश पा चुके हैं !वो सब हमारा "इलाज"भी कर रहे हैं ! और अगर इस विषय के साथ जो मौतें हो रही हैं उनपर लिखने की सोचूं तो भी मन नहीं मान रहा है जी , क्योंकि पैसे वालों ने अपनी जान बचाने हेतु ना जाने आज से पहले पूरे देश में कितने लोगों को मारा या मरवाया है !
                       फिर सोचा धार्मिक उन्माद पर, देश के इतिहास ,जातिवाद और प्रदेशों में होने वाले चुनावों पर लिखूं ! लेकिन पता नहीं क्यों आज मन ने हामी ही नहीं भरी जी !  राजनितिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के संबंधों में आ रहे खोखलेपन पर लिखुँ लेकिन "चाह"यानिकि इच्छा ही नहीं हो रही ! तो फिर क्या लेख लिखना बंद कर दूँ ?? नहीं जी ! जिस प्रकार माखन लाल चतुर्वेदी जी ने अपनी कविता के अंत में पुष्प की चाह को वर्णित सच्चाई से किया था ,उसी तरह से मुझे भी एक लेखक के मन की सच्चाई को बताना ही होगा कि वो आजकल किस विषय पर लिखना चाहता है ?
                             मेरे ज्ञानानुसार एक लेखक केवल उस विषय पर लिखना चाहता है , जिस विषय पर लिखने से मानव-जाति का उद्धार हो सके , कल्याण हो सके जी !और वो विषय ये है कि मनुष्य के बारे में लिखना जैसे इसकी उत्पत्ति कैसे हुई , क्यों हुई , इसमें और जानवरों में क्या-क्या समानताएं हैं ? ऐसे कौन से कार्य हैं जिनको ये मनुष्य तो कर सकता है लेकिन कोई पशु नहीं कर सकता है ?ये मृत्यु के बाद कहाँ जाता है ? क्या फिर लौट के आता है ?? क्या पाप और पुण्य सच में होते हैं ? ये धर्म किस बला का नाम है ??प्रकृति का निर्माण किसके कहने से और क्यों हुआ है ? ये कब तक रहेगी ?आदि आदि ! आप भी सोचिये की आखिर आपका मन क्या चाहता है ?? फिर मुझे अवश्य बताइयेगा मेरे ब्लॉग में आकर , अपना अनमोल कॉमेंट लिख कर ! सधन्यवाद ! एकबार फिर नमस्कार !
                       
     
                        आपको बरसात के सुहाने मौसम की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाइयां ! मित्रो !!"5TH PILLAR CORRUPTION KILLER",नामक ब्लॉग रोज़ाना अवश्य पढ़ें,जिसका लिंक -www.pitamberduttsharma.blogspot.com. है !इसे अपने मित्रों संग शेयर करें और अपने अनमोल विचार भी हमें अवश्य लिख कर भेजें !इसकी सामग्री आपको फेसबुक,गूगल+,पेज और कई ग्रुप्स में भी मिल जाएगी !इसे आप एक समाचार पत्र की तरह से ही पढ़ें !हमारी इ-मेल ईद ये है - pitamberdutt.sharma@gmail.com. f.b.id.-www.facebook.com/pitamberduttsharma.7 . आप का जीवन खुशियों से भरा रहे !इस ख़ुशी के अवसर पर आपको हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !!
आपका अपना - पीताम्बर दत्त शर्मा -(लेखक-विश्लेषक), मोबाईल नंबर - 9414657511 , सूरतगढ़,पिनकोड -335804 ,जिला श्री गंगानगर , राजस्थान ,भारत !

Comments

  1. आपको सूचित किया जा रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (08-07-2015) को "मान भी जाओ सब कुछ तो ठीक है" (चर्चा अंक-2030) पर भी होगी!
    --
    सादर...!

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  3. बढ़िया विचारों को उड़ान देता लेख |

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