"तलाक-तलाक-तलाक बोलिए-और काम पे चलिए" !! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) - 9414657511

      लो जी !! पाठक मित्रो !! आज के इस भाग दौड़ के ज़माने में हमारे एक मुस्लिम भाई ने बड़े ही तुरत-फुरत तरीके से अपनी तथाकथित तंग करने वाली पत्नी जी से निजात पा ली है ! वो भी "जायज़" तरीके से ! कोई न्यायालय उसे ख़ारिज नहीं कर सकता !
            हुआ यूूँ कि "पुत्तर-प्रदेश"नहीं-नहीं "उत्तर-प्रदेश के बुलन्दशहर में अलीगढ शहर का फहीम खान नामक युवक अपनी पत्नी और बच्चों के संग इस्लामाबाद मोहल्ले में किसी रिश्तेदार को मिलने आया हुआ था ! वहाँ उसका अपनी पत्नी के संग किसी छोटी सी बात को लेकर बहस हो गयी ! रूठ कर जनाब बस अड्डे पंहुच गए तो बीवी भी पीछे आ गयी तो वहाँ भी बहस शुरू हो गयी ! बात इतनी बढ़ गयी की जनाब ने बीच सड़क पर ही तीन बार तलाक-तलाक - तलाक बोला और चल दिया अकेले अपने अलीगढ को ! "शायद बेचारी "बीवी उसकी खडी सोचती ही रह गयी कि या खुद ये क्या ज़ुल्म हो गया ?? अब मेरे तीन बच्चों का क्या होगा ?सात साल से दोनों बड़े प्यार से रह रहे थे ना जाने किसका मुंह देख कर चले थे कि ज़ुल्मी तलाक ही दे गया मामूली सी नहस पर ! तीनो बच्चे और वो महिला बस अड्डे पर जोर-जोर से रो रहे थे तो लगों के पूछने पर इस महिला ने ये बात बताई !
                       महिला-आयोग तक इस बेचारी की बात कब पंहुचेगी ,ये पता नहीं ! लेकिन इस मामले में कोई क़ानून कुछ नहीं कर सकता !जैसे सऊदी-अरब के एक राजनयिक के नेपाली महिला से गैंग-रेप में फंसने पर देश का कोई क़ानून उसे रोक नहीं पाया क्योंकि एक समझोते के मुताबिक ऐसा करना संभव नहीं है ! वैसे ही मुस्लिम क़ानून के तहत इस केस में कुछ कर पाना संभव नहीं है ! तो क्या कुछ बोला या लिखा भी नहीं जाए ?? ऐसा तो हो नहीं सकता ! जैसे मोदी जी को अदालत द्वारा 2002 दंगों से बरी कर दिए जाने के बाद भी हमारे "विद्वान-टीवी एंकर-पत्रकार"भाई आज तक उन्हें लपेट लेते हैं , वैसे ही हम भी प्रश्न उठाएंगे की हिन्दू क़ानून को भी इतना आसान क्यों नहीं बना दिया जाता कि कोई "पत्नी-पीड़ित"जब चाहे अपनी मुसीबत से निजात पा लेवे जी !हिन्दू आदमी के तो माता-पिता, भाई-बहन और दोस्तों तलक को बीच में उलझा दिया जाता है !
                   हम हमारे मुस्लिम भाइयों से ये अनुरोध करना चाहते हैं कि आप ऐसे विषयों पर सोचें और आवश्यक बदलाव लाने की कोशिश करें ! आज ज़माना बदल गया है लेकिन मानवीय भावनाएं चाहे वो किसी भी धर्म की ही क्यों ना हो कभी नहीं बदलती !आपके पुराने मुस्लिम क़ानून के मुताबिक तो शायद अब उस महिला को पहले किसी दुसरे आदमी के संग 6 महीने तलक साथ रहना पड़ेगा और फिर उससे तलाक लेकर अपने पुराने शौहर के साथ रह पाएगी ! लेकिन उसके बच्चों का क्या होगा ?बाकी रिश्तेदारों का व्यवहार उनके साथ कैसा होगा खुद ही जानता है !हर समाज के युवाओं को अब आगे बढ़कर अपनी बुराइयों को समापत करना होगा ! एक वैचारिक क्रान्ति अतिआव्वश्यक है जी ! खुदा हाफ़िज़ !!!अलाह मेहर करे !
                                            





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आपका अपना - पीताम्बर दत्त शर्मा -(लेखक-विश्लेषक), मोबाईल नंबर - 9414657511 , सूरतगढ़,पिनकोड -335804 ,जिला श्री गंगानगर , राजस्थान ,भारत ! इस पर लिखे हुए लेख आपको मेरे पेज,ग्रुप्स और फेसबुक पर भी पढ़ने को मिल जायेंगे ! धन्यवाद ! आपका अपना - पीताम्बर दत्त शर्मा , ( लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 9414657511

Comments

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (19-09-2015) को  " माँ बाप बुढापे में  बोझ क्यों?"   (चर्चा अंक-2103)  पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. आप की लिखी ये रचना....
    20/09/2015 को लिंक की जाएगी...
    http://www.halchalwith5links.blogspot.com पर....
    आप भी इस हलचल में सादर आमंत्रित हैं...


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  3. जो सम्पदाय खुद नहीं सुधरना चाहता, जो समय के साथ नहीं चलता, जो सदैव कटट्रपंथियों के अनुयायी हों, धर्म का व्यापक अर्थ जो न समझें, जिन्हें कटटरपंथी सदैव बहकाते रहें ऐसे समुदाय इस प्रकार की खामियों से निजात नहीं पा सकता वह चाहे कोई भी धर्म हो या जाति। मुस्लिम समाज के साथ भी कुछ ऐसी ही मुश्किल हैं आज भी इस समाज में कुछ लोग उसी मानसिकता से जी रहें हैं जब इसका प्रारम्भ हुआ था , मोहम्मद साहब द्वारा चलाये गए इस धर्म का कुछ अधकचरे व अपरिपक्व विचारों वाले लोगों ने गलत प्रचार कर अनावश्यक ही बदनाम कर दिया है
    ऐसे लोग हर धर्म सम्प्रदाय में मिल जायेंगे

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