"कोई सेक्स के लिए बलात्कार कर देता है ,तो किसी से सेक्स होता नहीं ", दोनों हालात घातक हैं !- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 9414657511

   अन्याय कैसा भी हो दुःखदायी होता है ! समाज ने अन्याय न होने पाएं , उसके लिए कुछ नियम बनाये हुए हैं ! जैसे हमारा संविधान कुछ समय पश्चात अधूरा लगने लगता है , बिल्कुल वैसे ही सामाजिक व्यवस्था भी पुरानी होती है !इसीलिए समय-समय पर दोनों में संशोधन होते रहते हैं ! लेकिन दोनों व्यवस्थाओं में संशोधन करने के तरीके बिलकुल ही अलग-अलग हैं ! जहाँ क़ानून में संशोधन तो हमारे साँसद "महोदय" ही कर सकते हैं वहीँ सामाजिक बुराइयों को दूर करने हेतु संशोधन करना उन्हीं लोगोंका काम होता है , जो उस "बीमारी"से पीड़ित हों !
                           "सती सावित्री"जैसी भारतीय नारी को "सरिता-मनोरमा-गृह शोभा-साप्ताहिक हिंदुस्तान और धर्मयुग" जैसी पत्रिकाओं में प्रकाशित कहानियों और लेखों ने "पश्चिमी-संस्कृति"अनुसार आधुनिक और बिकाऊ-मॉल बना दिया !इस सबके पीछे छिपे पैसे की चमक ने भी इस काम में अपना अहम रोल निभाया ! वैश्याओं का "गन्दा-धन्धा" दोनों संस्कृतियों में पुरातन काल से है ! केवल तरीकों का अंतर मात्र है !इसीलिए भारत में खुले सेक्स को बुरी चीज़ बताया गया लेकिन विदेशों में ये मनोरंजन के साधन के रूप में प्रचलित किया गया !इसीलिए हमारे नेता मुलायम सिंह जी आज भी जनता से पूछते हैं कि क्या कोई एक महिला से तीन आदमी बलात्कार कर सकते हैं ??लेकिन विदेशी संस्कृति में इसे "पार्टी मनाना या गैंग-सेक्स कहते हैं और जिसे हम बलात्कार कहते हैं वहां इसे "सरप्राईज़-सेक्स"कहा जाता है ! अंतर सोच का है !जब विदेशी संस्कृति के "पिछलग्गुओं'ने इस नारी-आधुनिकता की शुरुआत की थी तब उन्होंने ये नहीं सोचा होगा कि ये सेक्स गांव-गाँव और गली गली अपने पैर जमा लेगा !लेकिन आज की सच्चाई ये है की 4 साल के बच्चे को भी सेक्स की आवश्यकत है , बिलकुल वैसे ही जैसे उसे भोजन की आवश्यकता होती है , अपने पेट की भूख मिटाने के लिए !
                          तो अब क्या किया जाए ?? इस भयावह समस्या से निपटने हेतु , जो हमारे सामने सुरसा की तरह मुंह बाये खड़ी है ?? कितने और बलात्कारों का इंतज़ार करेंगे हम , इस समस्या के निजात हेतु कोई उपाय करने हेतु ???क्या केवल सज़ा देना ही हर मर्ज़ का इलाज होता है ??समाज कब जागेगा ?? वो कब आधुनिक बनेगा हमारे महान कोंग्रेसियों की तरह ??नेहरू जी से लेकर द्विग्विजय सिंह जी तलक बड़े अनुभवी नेता हमें "राह"दिखा चुके हैं ! अब तो दुसरे दलों के नेता भी विधानसभा में सेक्सी वीडिओ देखते पाये गए हैं ?? मैं इलज़ाम नहीं लगा रहा सिर्फ ये बताने की कशिश कर रहा हूँ कि हमें अब कबूल करना होगा कि हमें अब एक सेक्सबाज़ार की आवश्यकता है जो कानूनी हो सुरक्षित हो आधुनिक हो और हर गांव-शहर में हो! 
                        तभी हमारे "अतिसेक्सवादी ओरतें और पुरुष"उन "सेक्स-मंदिरों"में जा सकेंगे, बिना किसी रोक टोक के  बलात्कार होने भी रुक जाएंगे ! गर फिर भी कोई ऐसा घृणित काम करे तो उसे "क्रूर"सज़ा दी जाए ! ऐसा नहीं है कि हम कोई नया , कोई बड़ा कदम उठाएंगे , बल्कि आज तक जो छिप कर हो रहा है वो खुलेआम होगा ! सबको पता होगा की शराब की तरह सेक्स करने हेतु "उपयुक्त-सामान" कहाँ मिलता है!! बस इतनी सी तो बात है !!!जितने भी सेक्सी पुरुष और महिलायें हैं , और वो मेरी इस बात से सहमत हैं तो इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ! सधन्यवाद !जय श्री राम !
                           



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आपका अपना - पीताम्बर दत्त शर्मा -(लेखक-विश्लेषक), मोबाईल नंबर - 9414657511 , सूरतगढ़,पिनकोड -335804 ,जिला श्री गंगानगर , राजस्थान ,भारत ! इस पर लिखे हुए लेख आपको मेरे पेज,ग्रुप्स और फेसबुक पर भी पढ़ने को मिल जायेंगे ! धन्यवाद ! आपका अपना - पीताम्बर दत्त शर्मा , ( लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 9414657511

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