Tuesday, January 24, 2017

"मुझे आजाद किसने करवाया"??? - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतन्त्र-टिप्पणीकार) मो.न. +941465751

कल एक टीवी चेनेल पर बहषों रही थी कि "भारत को आजाद किसने करवाया"? उसमे कोई नेहरू-गांधी जी का पक्षकार था तो कोई भगत सिंह-सुभाष चन्द्र बोस का पक्षकार था !वहाँ कोई उन देश भक्तों का पक्षकार नहीं था जो अपनी जान देने से पहले उपरोक्त दोनों प्रकार के पक्षकारों के "प्रेरकों की लिस्ट"में अपना नाम लिखवाकर नहीं गए !बहस करने वाले "पक्षकार"गला फाड़-फाड़ कर केवल अपने पक्ष की वजस से आजादी मिली यही कहा जा रहा था !इसके साथ साथ वो एक दुसरे पर ये भी आरोप लगाए जा रहे थे कि हमारे स्वतन्त्रता सेनानी को इन्होंने हीरो बनने से तरह-तरह से रोकने का काम किया !आजादी के बाद इन्होंने अपनी मर्ज़ी से इतिहास को लिखवाया,पढ़वाया और प्रकाशित करवाया !जिससे हमारे नेता आज पीछे रह गए ! इनके नेता तो कोई "चाचा"बन गया तो कोई "राष्ट्र-पिता"बन गया और हमारा स्वतन्त्रता सेनानी बेचारा केवल "नेता जी" ही रह गया !
                          ये तो वो मसले हैं जो आजकल टीवी चेनल वालों को खूब कमाईयां करवा रहे हैं !दूसरी और वो मसले हैं जो आजादी के बाद बने नेताओं और पुराने नेताओं के "होनहार-बच्चों"ने पैदा कर दिए ! आज हम सब कहने को आजाद तो हैं , लेकिन "मनमर्ज़ियाँ"करता कोई "और"ही है !जनता रोज़ ही किसी न किसी बात पर अपने को ठगा हुआ सा महसूस करती है !मुझे याद है कि हमारे बुज़ुर्ग लोग अंग्रेजों के जाने के बाद भी उनके बढ़िया शासन की तारीफ़ किया करते थे और उनको कुछ कमियों के बावजूद अच्छा भी बताते थे !आज उनकी वो बातें बिलकुल सही नज़र आ रही हैं !
                         आज सोचता हूँ कि अगर मैं किसी का गुलाम होता तो मुझे कोई करने को काम तो मिलता ! समय पर भोजन तो मिलता !एक निश्चत मात्रा में धन भी मिलता ! आजकल ये सब सुविधाएँ भारतीय जेलों में ही उपलब्ध हैं !वहाँ मुझ जैसा "ईमानदार और शरीफ "आदमी जाना नहीं चाहता !मौजूद लोकतंत्र में या तो आपके पास किसी आरक्षित जाति में जन्मे का प्रमाण पत्र होना चाहिए !या फिर किसी बड़े व्यपारी या नेता का पुत्र होना आवश्यक है !तब तो आपका जीवन मजे से गुजर जाएगा अन्यथा मित्रो !इस आजाद देश में आजादी किसी काम की नज़र नहीं आती !कल एक बड़े कवि साहिब "पुस्तक-सम्मेलन"में फ़रमा रहे थे कि जिन "फ़िल्मी गीतों"पर महिलाओं को आपत्ति होनी चाहिए उन पर ही वो आजकल नाचती हैं !बात सौ प्रतिशत सही है लेकिन महाराज आप भी तो फिल्मों में वैसे ही गीत लिखकर इस स्टेज तलक पहुँचने में कामयाब हुए !भजन-लोकगीत लिखने वाले तो इस सम्मेलन की दर्शक कुर्सियों तलक भी नहीं पहुँच पाते हैं जी !
                   सारा सार आज की बात का ये है मित्रो कि "मैं"और मेरे जैसे साधारण एवं पवित्र लोग पहले तो मिलते काम हैं क्योनी हमारी प्रजाति लुप्त प्रायः है !अगर कहीं हम जैसे लोग दिखाए दे भी जाते हैं तो वो "विक्षिप्त"से ही नज़र आते हैं !वो अमीरों की महफ़िल में "मनोरंजन"के पात्र तो बन सकते हैं लेकिन कोई भी उनको "महत्व"नहीं देता !यहां तलक की भारत की जनता भी "वोट" देते समय उनको इस लायक नहीं समझती !इसीलिए मैंने आज ये बड़ा प्रश्न आपके सामने रख्खा है कि   "मुझे आजाद किसने करवाया"??? यारो पहले सच्चा संविधान तो बनाओ !!!अपना सिस्टम (तन्त्र)तो सही कर लो !कोई रोड मैप तो बनाओ !आम आदमी के दिमाग में सभी समस्याओं के निराकरण के तरीके हैं तो हमारे सांसदों के दिमागों में क्यों नहीं ?क्यों ये अपनी पार्टियों की "भेड़ें"बने फिरते हैं ?आप अपने विचार हमारे ब्लॉग पर आकर अवश्य सांझा कीजिये !आपके अनमोल कॉमेंट्स की प्रतीक्षा में !आपका ये मित्र !




5th पिल्लर करप्शन किल्लर" "लेखक-विश्लेषक पीताम्बर दत्त शर्मा " वो ब्लॉग जिसे आप रोजाना पढना,शेयर करना और कोमेंट करना चाहेंगे ! link -www.pitamberduttsharma.blogspot.com मोबाईल न. + 9414657511

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