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Showing posts from January, 2017

"बजट हमारा-आपके द्वारा" !क्यों नहीं हमें पूछते ?- पीताम्बर दत्त शर्मा मो.न.+ 9414657511

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लो जी !एकबार फिर हमारे ही द्वारा जो चुने गए हैं  कर्णधार,वो बनाएंगे हमारा बजट ,बताएंगे हमें कि क्या हमने अगले वर्ष खाना-पीना है ,कितना हमने अपनी सरकार को टेक्स देना है ,कितना धन देश की जनता का उसकी रक्षा पर लगना है और कितने धन से हमारे लिए साधन उपलब्ध करवाये जायेंगे ,जैसे रेल,बसें,बिजली-पानी और कपडा-मकान आदि !लेकिन हमारे नेता लोग ,समाजसेवी लोग और देश भक्त पत्रकार लोग अपनी "छिपी हुई सहूलियतें"कैसे प्राप्त करते आये हैं और कैसे भविष्य में प्राप्त करेंगे ?ये नहीं बताते !
                       कल हमेशां की तरह हमारे विपक्षी नेताओं ने एक मीटिंग करी और उसमे ये विचार तो किया की संसद को चलने से कैसे रोकेंगे , लेकिन ये नहीं विचार किया कि जनता को वो फायदे कैसे पहुंचेंगे ?जो उन्होंने अपने घोषणा-पत्रों में कर दिए हैं उनके वोट लेने हेतु !ऐसा सुनने में आया है कि "चतुर विपक्षी नेताओं" ने आज ऐसे तरीके अपनाये ,माननीय राष्ट्रपति जी का भाषण रोकने हेतु पहले तो भाषण के दौरान संसद का साउंड सिस्टम खराब करवा दिया ,बाद में एक सांसद ने बीमार होने का नाटक किया ! इसकी जांच होनी चाहिए !क्योंकि …

"मिलिए - श्री बल्ला राम भाट "से !!पुराणी संस्कृति के पुरोधा !- पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतन्त्र टिप्पणीकार)

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भारत के पाकिस्तान बॉर्डर के पास सूरतगढ़ शहर में रहने वाले श्री बल्ला राम भाट नामक शख्स रहते हैं ! आइये आज हम आपका परिचय इनसे करवाते हैं !आज तलक आपने कई तरह के मशहूर शख्सियतों के बारे में जाना होगा ,आप कइयों से मिले भी होंगे , लेकिन इनके बारे में हम जो कुछ आज आपको बताएँगे वो आपने शायद ना देखा हो और ना ही सुना होगा !


साधारण जीवन ,पुराणी संस्कृति के अनुसार ज़ेवर पहनना , मेहनत करके खाना और सदा सुखी रहना इनके स्वभाव में हैं !74 वर्षीय बल्ला राम श्री बोहरा राम की सन्तान हैं ,जो घुम्नतरु जातियों में से एक बंजारा भाट जाति से सम्बन्धित हैं !सड़क निर्माण में पहले मजदूरी का काम करते थे ,फिर उन मजदूरों के "जमादार"बन गए और आजकल ये ठेकेदार हैं इनके 3 बहने ओऱ 5 भाई हैं !5 लड़के और 3 लड़कियां हैं !इनके पुराने गाँव "कापेरो",मेड़ता जैसलमेर हैं !इनकी जाति के 200 परिवार यहां आस-पास रहते हैं !जिनके लड़ाई-झगडे ये ही निपटाते हैं !ये आज के चुने हुए नेता नहीं बल्कि पुरानी परंपरा के सरपंच हैं !इनकी जाति के लोग इन्हें बड़ी इज्जत देते हैं !ये तलवारबाज़ी और लठ्ठ-बाज़ी के माहिर हैं !इनकी पत्नी श्रीमती नाथ…

"जो संविधान इतनी लूट-खसूट मचाने की इज़ाजत दे !उसे भला क्यों सही करें हमारे नेता लोग"????

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गणतंत्र का लोकतंत्र जिन्दाबाद ! संविधान लागू होते ही लोकतंत्र के जिस पाठ को देश ने पढ़ा, वह वोट देने कीबराबरी का ही था। 1950 में 17 करोड 32 लाख,12 हजार, 343 वोटर थे तो आज यानी 2017 में 83 करोड 40 लाख 82 हजार 814 वोटर हो चुके हैं। यानी दुनिया के सबसे बडे लोकतांत्रिक देश होने का तमगा लिये भारत का अनूठा सच ये भी है कि अपनी सत्ता खुद चुनने वाले देश में सत्ता ने चुनने वालो को ही जाति धर्म से लेकर महिला-युवा और गरीब-रईस में भी बांटा। अपना संविधान अपनी सरकार थी तो भी संविधान में दर्ज लोकतंत्र की धज्जियां जमकर उड़ायीं गईं। आपातकाल तो18 महीने रहा। लेकिन बरस दर बरस संसदीय चुनावी लोकतंत्र के राग को देश में हर सत्ता ने कुछ इस तरह गाया कि कि संविधान में दर्ज जनता के हक को देने या छिनने की राजनीति चुनावी मेनिफेस्टो में सिमट गई। और देश इतना गरीब होता चला गया कि 2017 में 1950 के हिन्दुस्तान से दोगुने नागरिक गरीबी की रेखा से नीचे खड़े नजर आये। शिक्षा-हेल्थ-पीने का पानी भी मुनाफे के धंधे में समा गया। खेती से उघोग और उघोग से खनिज संसाधनों की लूट सबसे बडी कमाई बन गई। लेकिन सत्ता उसी को मिली जिसने भूखी जनत…

"चढ्ढी पहन के फूल खिला है " !! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)मो.न.+9414657511

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प्रिय मित्रो ! "बसन्त-बहार "का महीना शुरू होने को है !बाग़,उपवन,बगीचे,क्यारियां और फ्लैटों की गैलरियां रंगबिरंगे सुंदर-सुंदर फूलों से सजने लगी हैं !प्रकृति ने सुंदर छटा बिखेरनी शुरू कर दी है !पहाड़ों पर बर्फ पड़ने लगी है !सब तरफ सफेद-सफेद चादर सी बिछी हुई लगती है !वहाँ थोड़ा रुक कर बहार आएगी !लेकिन हिमालय के साथ लगते इलाकों में वातावरण "रमणीय"होने लगा है !गीत गाने को मन करने लगा है !"भ्रमर "कलियों के इर्द-गिर्द "डोलने"लगे हैं !जिन्हें देख कर मन "बावरा"हुआ जा रहा है !दूर-दूर तलक घुमते रहने को मन करता है !घण्टों चलते-चलते किसी के साथ बतियाने को मन करता है ! लेकिन हाय री  !! ये उम्र !!और ये मोटा थुलथुला शरीर !जो आजकल की आधुनिक बिमारियों से भर चुका है !इस की वजह से  कुछ भी कर नहीं पा रहे हैं !बस ! देख-सुन और लिखकर ही अपनी इस "पवित्र-आत्मा"को शांत कर लेते हैं !इसीलिए हमने आज के इस लेख का शीर्षक भी बच्चों वाला ही रख्खा है !क्योंकि कहते हैं ना कि बुढ़ापा और बचपन एक सा ही होता है !
                     लेकिन देश के नेता कभी बूढ़े होते ही नह…

"चश्मा उतारो !! फिर देखो यारो"! - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतन्त्र टिप्पणीकार) मो.न. +9414657511

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आज एक समाचार ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि हम आज भी कितने "पुराने-ढर्रे"पर चल रहे हैं और दूसरों को भी हमारी ही  मुताबिक  देखना चाहते हैं !सतयुग-द्वापर और त्रेता युग की अच्छी-अच्छी बातें सुनेंगे-सुनाएंगे,और इतिहास की गहरी धूल में छिप चुके चन्द महापुरषों और वीरांगनाओं की कहानियों पर चलने हेतु अपनी अगली पीढ़ी के बच्चों को मजबूर करेंगे !क्या सन्त लोग , क्या नेता लोग, क्या समाजसेवी लोग और क्या महान पत्रकार-एंकर लोग चिल्ला-चिल्ला कर कहते दिखाई पड़ते हैं कि देखो उसने "विवादित"ब्यान दे दिया !उसने महिलाओं की भावनाओं को तार-तार कर दिया !वगैरह-वगैरह !!
                    लेकिन आज जिधर देखो उधर क्या बच्चे क्या बड़े ,अपनी सभी सीमाएं तोड़ते ही नज़र आते हैं ! लड़कों की गलतियां तो हम बड़े चटखारे ले-लेकर सुनाते फिरते हैं लेकिन जब लड़कियों की बात आती है तो हम उसपर "सौ -सौ मुलम्मे "चढाने लग जाते हैं !भारत के "महिला-आयोग "की महान चरित्रवादी बहनें टीवी पर आकर बड़े नेताओं को सम्मन भेजने की बातें करती हैं लेकिन उन "बुरी-महिलाओं"को सुधरने के कोई कदम उठती नज़र नहीं …

"मुझे आजाद किसने करवाया"??? - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतन्त्र-टिप्पणीकार) मो.न. +941465751

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कल एक टीवी चेनेल पर बहषों रही थी कि "भारत को आजाद किसने करवाया"? उसमे कोई नेहरू-गांधी जी का पक्षकार था तो कोई भगत सिंह-सुभाष चन्द्र बोस का पक्षकार था !वहाँ कोई उन देश भक्तों का पक्षकार नहीं था जो अपनी जान देने से पहले उपरोक्त दोनों प्रकार के पक्षकारों के "प्रेरकों की लिस्ट"में अपना नाम लिखवाकर नहीं गए !बहस करने वाले "पक्षकार"गला फाड़-फाड़ कर केवल अपने पक्ष की वजस से आजादी मिली यही कहा जा रहा था !इसके साथ साथ वो एक दुसरे पर ये भी आरोप लगाए जा रहे थे कि हमारे स्वतन्त्रता सेनानी को इन्होंने हीरो बनने से तरह-तरह से रोकने का काम किया !आजादी के बाद इन्होंने अपनी मर्ज़ी से इतिहास को लिखवाया,पढ़वाया और प्रकाशित करवाया !जिससे हमारे नेता आज पीछे रह गए ! इनके नेता तो कोई "चाचा"बन गया तो कोई "राष्ट्र-पिता"बन गया और हमारा स्वतन्त्रता सेनानी बेचारा केवल "नेता जी" ही रह गया !
                          ये तो वो मसले हैं जो आजकल टीवी चेनल वालों को खूब कमाईयां करवा रहे हैं !दूसरी और वो मसले हैं जो आजादी के बाद बने नेताओं और पुराने नेताओं के "ह…

"लूट-घूस की सत्ता तले स्कूली बच्चो की मौत" !! "क्यों नहीं रोते हम"??

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इतनी खूबसूरत दुनिया के लिये भगवान तुम्हारा शुक्रिया / भोजन देने के लिये भगवान तुम्हारा शुक्रिया /पक्षी का इतना सुंदर गीत सुनाने के लिये भगवान तुम्हारा शुक्रिया / हर चीज जो तुमने दी भगवान उसका शुक्रिया पहली कक्षा में इस कविता को पढ़ने वाला बच्चा अब इस दुनिया में नहीं है। सड़क किनारे जमीन पर बिखरे किताब कॉपी। टिफिन बाक्स। बस्ते में उस बच्चे के मांस के लोथडे भी हैं, जो किताबो को पढ़ पढ़ कर भगवान की बनायी दुनिया में जीने और बड़े होने के सपनों को जीता रहा। और इस कविता के जरीये भगवान को शुक्रिया कहता रहा जिसने जमी, आसमान, पक्षी बनाये। वातावरण में ही जिन्दगी के रस को घोल दिया। लेकिन इस बच्चे को कहां पता था जो किताबों में लिखा हुआ है। या जिन कोमल हाथों से पन्नों को उलटते हुये वह मैडम के कहने पर भगवान तुम्हारा शुक्रिया कर अपने सपनो को जीता उसे इतनी खौफनाक मौत मिलेगी जो भगवान ने नहीं बल्कि भगवान बन देश चलाने वालों ने दी। हर बैग के भीतर ऐसी ही किताब -कापी में दर्ज बच्चों के सपने हैं। वह सपने जिसे बच्चो ने पालना और सीखना ही तो शुरु किया था। और अंधेरे में उठकर मा बच्चे के टिफिन को भरने में लग जात…

"तो भाजपा हारेगी"और भाजपा हारेगी तो"??- पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतन्त्र टिप्पणीकार) मो.न.+ 9414657511

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परमप्रिय माननीय पाठक मित्रो ! सादर नमन !आज मैं आपसे एक विशेष चर्चा करना चाहता हूँ !क्योंकि आज कुछ ख़ास किस्म की घटनाएं घटित हुई हैं !जिनमे से कुछ का ज़िक्र मैं आपके साथ करना चाहूंगा !ये घटनाएं आपको बतलायेंगी कि भारतीय राजनितिक दल ,उनके नेता और वामपंथी सोच वाला एवम कोंग्रेस द्वारा पोषित मीडिया हम भारत वासियों के बारे में क्या-क्या सोचता है !ये किस प्रकार से हम भारतवासियों पर षड्यन्त्र रचकर हम पर शासन करना चाहते हैं !ये हमारे रीती-रिवाजों,त्योहारों और परम्पराओं को तोडना चाहते हैं !ये हमारी न्याय-संगत बात को भी गलत साबित करना चाहते हैं !देखिये इन घटनाओं को फिर विचार कीजिये !
                      1. अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के शपथग्रहण समारोह दिखने के साथ साथ "चतुर"पत्रकारों द्वारा "वाम"सोच को सही साबित करना,वहां के "सात्विक-विरोध"प्रदर्शन को भारत के "तोड़-फोड़-प्रदर्शन"जैसा ही बताना जैसे कुत्सित प्रयास हुए हैं !कुछ मीडिया घराने आजकल स्वयं को "खुदा"समझने लगे हैं !उनको ये लगने लगा है कि हम जनता और कर्णधारों को जैसा चाहें वैसे चला सकते …

"धक्के के जनसेवक और शोषित कार्यकर्ता"!? - "परुपदेशक"

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क्या भारत आज भी आजाद है ?क्या हम स्वयं अपने लिए कोई क़ानून बना या रद्द कर सकते है ?क्या हम अपने हित की कोई योजना बनाकर इस देश में लागू कर सकते हैं ?क्या हम किसी भ्रष्ट अफसर पर कोई कार्यवाही कर सकते हैं ?क्या हम किसी अच्छे आदमी को चुन या बुरे को हटा सकते हैं ? अगर नहीं तो क्यों हम इन 70 सालों में पनपे "नक़ली-जनसेवकों"की "चतुर-चालों"में फंस कर इनको ही घूम-फिर कर अपना "अनमोल-वोट"दे देते हैं ,फिर ये नेता रुपी राक्षस अपने रिश्तेदारों को हमारा खून पिलाते हैं !
                      सभी राजनीतिज्ञों के निष्ठावान कार्यकर्त्ता तो बेचारे दरियां बिछाते,भाषण देते नारे लगाते और वोट भुगताते ही रह जाते हैं !लेकिन जब समय चुनाव में टिकट देने का आता है ,तब ये नेता अपने कार्यकर्त्ता को छोड़ दुसरे को "जिताऊ"मानते हैं जो अपना दल छोड़ ,हमारी पार्टी में आया हुआ होता है !आखिर कौन होता है इस दलबदल के पीछे ??और कौन होता है उस राजनितिक दल के पीछे जो कुछ समय पहले अपना मुख्यमंत्री पद के घोषित उम्मीदवार को ही पीछे धकेलकर किसी दुसरे दल के साथ ही गठबंधन कर लेता है ?और फिर एक "…

"अलग विचारधारा"या देश-द्रोह ? - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतन्त्र-टिप्पणीकार) मो.न. - +9414657511

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अलग विचार धाराएं भारत में आज से नहीं तबसे हैं जब से सृष्टि ने इसका निर्माण किया था !सबकी बातें सुनी जाती थीं , सुनी जाती हैं और सुनी जाती रहेंगी इस भारत में !लेकिन इस तथाकथित विचारधारा के नामपर देश को तोडने का काम और स्वयं को सत्ता में स्थापित करने का कुत्सित प्रयास जबसे होने लगा तो इसका भरपूर विरोध भी भारत में होने लगा !ये भी एक कटु स्तय है !लेकिन इन नए "विचारकों" ने बड़ी ही चतुराई से पहले मुस्लिम शासकों , फिर अँगरेज़ शासकों के धर्म को भारत में मान्यता दिलाने के प्रयास में मदद देने का लालच देकर अपने लिए उनकी नज़रों में एक विशेष स्थान बना लिया !
                            एक "फार्मूला"ये बन गया कि वो इनको धन और सन्मान देते थे ,स्मृति चिन्हों के साथ ऊंचे स्थान सत्ता में देते थे , उसके बदले में ये भारत के हिंदुओं को उसकी संस्कृति, इतिहास और परम्पराओं से बड़ी "दूर" ले गए !इस छिपे हुए मिशन के कार्यकर्ताओं की वेशभूषा ठेठ भारतीय होती है , जैसे इनकी महिला-कार्यकर्ता मोटी बिंदियाँ लगाती हैं,सूती वस्त्र पहनती हैं और सूखे सफेद बाल लहराकर चलती हैं तो वहीँ पुरुष कार्यकर्…

अंधेरे में रौशनी की खोज करता हिन्दुस्तान !!! ????

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कोई कह रहा है-आर्थिक इमरजेन्सी । तो कोई फाइनेंशियल इमरजेन्सी तो कोई सुपर इमरजेन्सी भी कहने से नहीं चूक रहा है । तो क्या 1975 के आपातकाल के आगे के दौर को मौजूदा वक्त के खांचे में देखा जा रहा है । या फिर नोटबंदी प्रधानमंत्री मोदी का ऐसा राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक है, जिसके दायरे में हर राजनीति सिमट गई है और हर तरह की राजनीति के केन्द्र में प्रधानमंत्री मोदी आ खड़े हुये हैं। या फिर इमरजेन्सी शब्द को विपक्ष अब इस तरह क्वाइन कर रहा है, जिससे इंदिरा गांधी की इमरजेन्सी के सामानांतर मोदी की इमरजेन्सी घुमडने लगे। याद कीजिये इमरजेन्सी के खिलाफ जेपी के संघर्ष को खारिज करने के लिये इंदिरा गांधी विनोबा भावे की शरण में गई थीं। और जेपी ने जब संपूर्ण क्राति का आंदोलन छेड़ा तो विनोबा भावे से कागज पर इमरजेन्सी को इंदिरा गांधी ने अनुशासन पर्व लिखवा लिया। लेकिन मौजूदा वक्त में ना तो जेपी सरीखा कोई संघर्ष है और ना ही नैतिक बल लिये विनोबा भावे । और 1975 में तो संघ परिवार भी जेपी के पीछे जा खडा हुआ था । और जिस बीजेपी के पास मौजूदा वक्त में सत्ता हैा उनके तमाम नेता इंदिरा की इमरजेन्सी में संघर्ष करते हुये ही पह…

जय जवान जय किसान का नारा कैसे लगायें ??????

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अजीब संयोग है कि 11 जनवरी को देश के उसी प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि है, जिसने देश को जय जवान जय किसान का नारा दिया। और शास्त्रीजी की 51वीं पुण्यतिथि के मौके पर ये सवाल उठ रहा है कि सीमा पर तैनात जवान को भी सूखी रोटी और नमक-हल्दी में रंगे पानी में दाल मिलती है और हर पांच घंटे में एक किसान खुदकुशी क्यों कर लेता है। तो कोई भी कह सकता है कि जय जवान जय किसान का नारा चाहे हिन्दुस्तान की रगों में आज भी दौ़ड़ता हो। और साढे तीन लाख जवानों की तादाद बीते 70 बरस में बढ़कर 47 लाख हो चुकी। और इसी तरह किसानों की तादाद भी 11 करोड़ से बढ़कर चाहे आज 21 करोड़ हो चुकी हो। लेकिन सच यही है ना तो जय जवान का नारा लगाते हुये बीते 70 बरस के दौर में कभी जवानों की जिन्दगी की भीतर झांकने की कोशिश किसी भी सरकार ने की और ना ही किसान को राहत पैकेज से आगे बढ़ाने की कोई कोशिश बीते 70 बरस के दौर में किसी सरकार ने की। प्रति दिन प्रति जवान के भोजन पर 100 रुपये सरकार खर्च करती है। और प्रति किसान की औसत आय देश में प्रति दिन 40 रुपये से आगे बढ़ नहीं पायी है। यानी दुनिया के सबसे बडा लोकतांत्रिक देश के भीतर…

"मुलायम की "मुलायम - चाल"!!-पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतंत्र-टिप्पणीकार) मो.न.+ 9414657511

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समाजवादी उसे कहते हैं जो सभी लोगों का बराबर ध्यान रख्खे,जाति-पाति,धर्म और इलाकेवाद में कोई भेदभाव ना बरते !लेकिन उत्तर प्रदेश के तथाकथित समाजवादी अब अपना धर्म भूल कर जनता को बरगलाने का काम कर रहे हैं !केवल अपने परिवार की चिंता करते नजर आ रहे हैं !अपनी विचारधारा को सभी राजनीतिक दल कभिका त्याग चुके हैं !कोंग्रेस केवल घोटाले करके बराबर-बराबर हिस्से बांटने में विश्वास करने लगी है ,कम्युनिस्ट लोग मेहनतकश का साथ छोड़ ,सत्ता पाने के लिए लालायित नज़र ज्यादा आते हैं तो क्षेत्रीय दल केवल एक परिवार का ही शासन चले इसी फ़िराक में लगे रहते हैं !वहीँ "अलग"किस्म की पार्टी नज़र आने वाली भाजपा भी कभी देशभक्ति करती नजर आती है तो उसके कई नेता सबसे बड़े बेईमान भी नज़र आते हैं !"राम मन्दिर बनाने की कसम खाने वाले "आधे तो बेचारे राम को प्यारे हो गए , या फिर "मार्ग-दर्शक"बना दिए गए !बेचारे मोदी जी अकेले दस-पन्द्रह लोगों के साथ क्या और कितना कर पाएंगे ये भी देखने की बात होगी !जनता सब जानती है शायद इसीलिए मोदी जी को अपना भरपूर समर्थन दे रही है !
                         राहुल गांधी ने ऐसा…

मेरी सुपुत्री सुकुमारी सुकृति शर्मा , जिसका आज जन्मदिन है - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतन्त्र-टिप्पणीकार)

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प्रिय मित्रो ! आज मेरी प्यारी बेटी "सुकृति शर्मा काजन्मदिन है !वो पहले "ज़ी टीवी ग्रुप" नॉएडा में और आजकल "पत्रिका राजस्थान" के टीवी चेनेल में प्रोड्यूसर एवम एंकर के पद पर जयपुर में कार्यरत है !आपके आशिर्वाद से अगले महीने दिनांक 23 फरवरी 2017 को उसकी पटना में शादी है !भगवत कृपा से बहुत ही बढ़िया परिवार हमें मिला है !मेरी बेटी पर मुझे नाज़ है !उसने अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है !भगवान ऐसी बुद्धिवान बेटियां सबको दे !
                 ये सब यहां लिखने का तातपर्य केवल इतना ही है ताकि इसको पढ़कर लोग और ज्यादा अपनी बेटियों का सन्मान करना,उन्हें पढना-लिखाना और उच्चस्तर पर पहुँचता देखें !आपके आशिर्वाद की भी अत्यंत आवश्यकता है जी उसे !सधन्यवाद !!
                                   आपका मित्र ,
                                      पीताम्बर दत्त 



"5th पिल्लर करप्शन किल्लर" "लेखक-विश्लेषक पीताम्बर दत्त शर्मा " वो ब्लॉग जिसे आप रोजाना पढना,शेयर करना और कोमेंट करना चाहेंगे ! link -www.pitamberduttsharma.blogspot.com मोबाईल न. + 9414657511

"सेक्स की भूख से पगलाए "कुत्तों"की राक्षसी छेड़छाड़"!त्रस्त समाज ! - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतन्त्र टिप्पणीकार)- +9414657511

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सभी विद्वत्जन कहते हैं कि इंसान को परमात्मा ने "बुद्धि"दी है इसलिए ताकि वो जान सके कि वो कौन हैं?क्यूँ है कहाँ से आया है ?कहाँ जाएगा?उसे इस जीवन में क्या करना है ?क्या नहीं करना है?क्यों बार बार आता है?और कैसे वो इस आने-जाने के चक्कर से "छुटकारा"पा सकता है !पश्चिमी वैज्ञानिक लोग तो मानते हैं कि "मानव पहले बन्दर"था धीरे-धीरे वह मनुष्य बन गया !लेकिन एशियाई देशों में इंसान का इतिहास अलग-अलग बताया जाता है !ज्यादा धार्मिक ग्रंथों में जाकर आपको बोर नहीं करना चाहता , इसलिए इतना ही बताता हूँ कि हमारे मास्टर जी तो किसी को "कुत्ते का बच्चा",किसी को खोते दा  पुत्तर"बताते रहते थे !लड़कियों को कुछ भी नहीं कहा जाता था ,हालांकि वो लड़कों से ज्यादा शरारतें करतीं थी !जैसे आज चेनलों के एंकर,महिला-आयोग की महिलाएं,अखबार के सम्पादक और "महान-नेता"किसी भी "अभद्र-महिला"को कुछ भी नहीं कहने देते !टीवी 24 ने तो ऐसी महिलाओं की रक्षा करने हेतु अपने पैनल में "हार्ड-कौर"नामक महिला को भी बुला रख्खा था एक बहस के कार्यक्रम में , जिसने भरपुर शराब …