लौह अयस्क में भी दो हजार करोड़ का घोटाला !! ???



ठ्ठ नीलू रंजन, नई दिल्ली केंद्र सरकार के हजारों करोड़ रुपये के घोटालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन, कोयला ब्लाक आवंटन व दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के निजीकरण में घोटाले के बाद अब नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कारपोरेशन (एनएमडीसी) द्वारा लौह अयस्कों की बिक्री में घोटाले का पर्दाफाश कैग ने किया है। खास बात यह है कि खुद स्टील मंत्रालय इस घोटाले पर मुहर लगा रहा है। एनएमडीसी के ऑडिट के दौरान नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) को लौह अयस्कों को बेहद कम कीमत पर बेचे जाने के सुबूत मिले हैं। कैग की ड्राफ्ट रिपोर्ट के अनुसार इससे सरकारी खजाने को 2000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कैग के इस आकलन से स्टील मंत्रालय भी सहमत है। पिछले एक महीने में कार्मिक मंत्रालय को भेजे गए दो पत्रों में स्टील मंत्रालय ने एनएमडीसी में लौह अयस्क की बिक्री में 2000 करोड़ रुपये के घोटाले का जिक्र किया है। कार्मिक मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार घोटाले की स्वीकारोक्ति के पीछे स्टील मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा 
की मंशा कई महीने से खाली चल रहे एनएमडीसी के सीएमडी के पद पर मनपसंद अधिकारी को बैठाना है। हालांकि सार्वजनिक उपक्रम चयन समिति (पीईएसबी) पिछले साल इस पद के लिए स्टेट प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के सीएमडी एमएस राणा का चयन कर चुकी है, लेकिन केंद्रीय सतर्कता आयोग से राणा की विजिलेंस क्लियरेंस मिलने में एक साल से अधिक समय खप गया। जब उन्हें विजलेंस क्लियरेंस मिला तो वर्मा ने नया अड़ंगा उनकी अनुभवहीनता का लगा दिया है। स्टील मंत्रालय ने 19 जुलाई को कार्मिक मंत्रालय को एमएस राणा को विजिलेंस क्लियरेंस नहीं मिलने और एनएमडीसी में घोटाले का हवाला देते हुए नए सिरे से सीएमडी की खोज प्रक्रिया शुरू करने को कहा था। इसके 10 दिन बाद ही सीवीसी से राणा का विजिलेंस क्लियरेंस आ गया। जब कार्मिक मंत्रालय ने स्टील मंत्रालय को राणा की नियुक्ति के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया तो स्टील मंत्रालय ने राणा को रोकने के लिए अपने जवाबी पत्र में कहा कि उनके पास माइनिंग का अनुभव नहीं है, जबकि इसी महीने खुद स्टील मंत्रालय माइनिंग का अनुभव नहीं रखने वाले मलय चटर्जी को कुद्रेमुख आयरन ओर कारपोरेशन का सीएमडी बना चुका है।

Comments

  1. एन एन डी सी के आंतरिक परतो में कई मामले छुपे पड़े है |इन मुदुद्दो के तार बड़े प्रसानिक अधिकारियों, राजनेताओं से कारपोरेट घरानों के गहरे जुड़े है | इस जाल का एक भी सिरा भी उधेड़ गया तो पूरा जाल खुल जाएगा पर खोलने की जहमत कौन गवारा करेगा जब समय समय पर एन एन डी सी प्रबंधन लोकतंत्र के सभी खम्बो का जेब बराबर पदानुक्रम के अनुसार बराबर भर रही हो |

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