भगवान के कल्कि अवतार से होगा कलयुग का अंत !!! ????




भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार हैं| भगवान विष्णु ईश्वर के तीन मुख्य रुपों में से एक रूप हैं इन्हें त्रिमूर्ति भी कहा जाता है ब्रह्मा विष्णु, महेश के मिलन से ही इस त्रिमूर्ति का निर्माण होता है| सर्वव्यापक भगवान श्री विष्णु समस्त संसार में व्याप्त हैं कण-कण में उन्हीं का वास है उन्हीं से जीवन का संचार संभव हो पाता है संपूर्ण विश्व श्री विष्णु की शक्ति से ह
ी संचालित है वे निर्गुण, निराकार तथा सगुण साकार सभी रूपों में व्याप्त हैं|

पुराणों में भगवान विष्णु के दशावतारों का वर्णन है। इनमें से नौ अवतार हो चुके हैं, दसवें अवतार का आना अभी शेष है। धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु का यह अवतार कल्कि अवतार कहलाएगा। पुराणों के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यह अवतार होगा, इसलिए इस दिन कल्कि जयंती का पर्व मनाया जाता है।

भगवान विष्णु के प्रमुख अवतार-

जब-जब पृथ्वीलोक पर धर्म की हानि हुई तब- तब भगवान विष्णु ने अपने भक्तों को बचाने व धर्म की रक्षा के लिए अवतार लिए| भगवान विष्णु के कुछ अवतार इस प्रकार हैं-

मत्स्य अवतार- इस अवतार में भगवान विष्णु ने मछली का रूप धरा और पृथ्वी के जल मग्न होने पर ऋषि- मुनियों समेत कई जीवों की रक्षा की| भगवान ने ऋषि की नाव की रक्षा की थी तथा ब्रह्मा जी ने पुनः जीवन का निर्माण किया| एक अन्य कथा अनुसार शंखासुर राक्षस जब वेदों को चुरा कर सागर में छुपा गया तब विष्णु ने मत्स्य रूप धारण करके वेदों को मुक्त करके उन्हें पुनः स्थापित किया|

कूर्म अवतार- इस अवतार में भगवान विष्णु ने क्षीरसागर समुद्रमंथन के समय मंदर पर्वत को अपने कवच पर संभाला था उनकी सहायता से देवों एंव असुरों ने समुद्र मंथन करके चौदह रत्नों की प्राप्ति की|

वराहावतार अवतार- इस अवतार में भगवान विष्णु ने पृथ्वी कि रक्षा की थी, एक पौराणिक कथा अनुसार भगवान ने हिरण्याक्ष नामक राक्षस का वध किया था| हिरण्याक्ष हिरण्यकश्यप का भाई था|

नरसिंहावतार- इस अवतार में भगवान श्रीहरि ने हिरण्यकश्यप का वध करके भक्त प्रहलाद की रक्षा की थी| इसके अलावा वामन अवतार में विष्णु जी बौने के रूप में प्रकट हुए तथा राजा बलि से देवतओं की रक्षा की, त्रेता युग में 'राम' अवतार लेकर लंकापति रावण का वध किया| द्वापर में 'कृष्णावतार' हुआ| इस अवतार में कंस का किया, 'परशुराम अवतार' में विष्णु जी ने असुरों का संहार किया|

माना जाता है कि भविष्य में कलयुग का अंत करने के लिए भगवान विष्णु कल्कि अवतार लेंगे|

कल्कि अवतार की कथा-

धर्म ग्रंथों में भगवान विष्णु के कल्कि अवतार के बारे में विस्तृत वर्णन है। उसके अनुसार कल्कि अवतार कलियुग व सतयुग के संधिकाल में होगा। यह अवतार 64 कलाओं से युक्त होगा। पुराणों के अनुसार उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद जिले के शंभल नामक स्थान पर विष्णुयशा नामक तपस्वी ब्राह्मण के घर भगवान कल्कि पुत्र रूप में जन्म लेंगे। कल्कि देवदत्त नामक घोड़े पर सवार होकर संसार से पापियों का विनाश करेंगे और धर्म की पुन:स्थापना करेंगे।

भारत में कल्कि अवतार के कई मंदिर भी हैं, जहां भगवान कल्कि की पूजा होती है। यह भगवान विष्णु का पहला अवतार है जो अपनी लीला से पूर्व ही पूजे जाने लगे हैं। जयपुर में हवा महल के सामने भगवान कल्कि का प्रसिद्ध मंदिर है। इसका निर्माण सवाई जयसिंह द्वितीय ने करवाया था। इस मंदिर में भगवान कल्कि के साथ ही उनके घोड़े की प्रतिमा भी स्थापित है।
 

Comments

  1. आओ मानव जीवो बतलाता हु बदल जाता ह युग केसे रे,
    और आता ह अंडकार के उंदकर से नवयुग रे,
    जिस जिस को मालुम ह वो वो वो जान लो रे,
    आ ग्या समय एक याद आने का क्या क्या तुमने याद किया,
    वो नही काम आना रे,
    एक ही सवाल ह उसका क्या क्या याद ह तुमको रे,
    बस यही तुम फंस जाई गा रे,
    अब तो कर याद से तु सवाल,
    वरना महायाद की एक याद मे तु भी गुम चला जायगा रे,
    हे मानव कह रहा हु सच मगर केसे तु समझैगा रे,
    ये तुज को ही मालुम होगा रे,
    हम तो इतना जाने यही भासा को बास कर तुम समझता ह रे,
    फिर किस का एन्तजार ह क्या ज्यादा बोलना सत्य का साक्षी ह रे,
    अगर नही तो मानव जान ले कारण कोई भी हो रे,
    मगर युग बदलने का कारण किसी एक मानव जीव के लिये नही होता रे,
    ना ही वो धरती के लिया मानव और धरती तो उस कारण मे ह रे,
    मगर एक मानव उस कारण को जान सकता ह रे,
    देहसमय रहने तक ये मानव मे ताकत ह रे,
    मगर मानव को उसी ताकत का गुमान ह रे,
    उसको जीवन भर गुलाम बना कर रखता ह रे,
    और देह छोड़ने के बाद उसी गुमान का नशा जब टूटता ह रे,
    तो फिर एक बार ना सोने की कसम ही लेता ह रे,
    और फिर आने के लिया रोता ह रे,
    मगर आता उसी योनि मे ह रे,
    जिस की याद उस याद मे बंद ह रे,
    समय ना बेकार कर सोच क्या याद करना ह तुजको रे,
    जो तु भूल गया कोन ह क्या तु जान गया रे,
    अगर नही तो मरना ह क्या रे,
    भाग जा के जान ले जब तक तुज को मालुम ह ये स्वासा ह रे,
    इनसे ही कर सवाल क्या तुम हो रे,
    होगी तो देगी जवाब बस तु जवाब याद करना छोड़ दे रे,
    सब को मालुम करना ह तो मालुम करना छोड़ दे रे,
    जो मालुम ना हो उस को मालुम कर दूसरों को समझाना छोड़ दे रे,
    जो कहते ह समझा आ गया वो सब से आगे मरता ह रे,
    जो मरता मानव जीव को देख कर डर कर भागता ह रे,
    वही सवाल तलाश करता ह और मिलता भी उसको ही ह रे,
    नही अब कोई जानन वाला
    नही अब कोई जानन वाला
    नही अब कोई जानन वाला
    नही अब कोई जानन वाला
    नही अब कोई जानन वाला
    नही अब कोई जानन वाला
    नही अब कोई जानन वाला
    नही अब कोई जानन वाला
    नही अब कोई जानन वाला

    क्या आप जाग गये हो मानव,
    अगर हा तो कैसे खुद को यकिन दिलाओगे रे,
    आप एक आंख से देख रहे है या दो आँखों से रे,

    कल्याण हो
    !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

    ReplyDelete
  2. पहला पन्ना या आखिरी पन्ना कहा से लिखु उस एक पल का सत्य समझ ही नही आता,
    क्या कुछ नही होकर चला गया उस एक पल मे,
    सब बिगङकर बन गया या यु कहो बनकर बिगङ गया उस एक पल मे,
    ना जाने कितना कुछ अपने अन्दर ही छुपा लिया उस एक पल ने,
    क्या कहु कैसै समझाऊ उस एक पल को,
    ना जाने कितने एक पल समा गये उस एक पल मे,
    क्या समझाऊ उस पल की कहानी क्या समझाऊ उस की दास्ता,
    जिसमे सब कुछ रूककर फिर शुरू हो गया,
    उस एक पल मे ना जाने कितने एक–एक पल के टुकङे होकर समा गये,
    फिर भी वो पल वही का वही रह गया,
    उस पल मे ना जाने कितने ही पल समाकर गुम हो गये,
    उस पल को खोजते-खोजते ना जाने कितने ही उस पल मे हमेशा के लिये गुम हो गये,
    कल भी छुपा था आज भी छुपा है,
    क्या है ऐसा उस पल के अंदर जिसमे न जाने कितने एक पल भी समाकर खो गए,
    अब तुम ही बतलाओ ए मानुष उस पल का कैसे तुम्हे राज समझाऊ,
    जिसमे एक-एक पल करके ना जाने कितने एक पल समा गए,
    मगर सवाल फिर भी वही का वही है,
    हम जानते उस एक-एक पल का आखिरी जवाब जहॉ तक है,
    उस एक पल को पकङ पाते है या जाते देख पाते है,
    नही ये जान पाते है क़्या हुआ उस आखिरी पल के बाद के पल मे,
    ना जाने कितने एक आखिरी पल खो गऐ उस आखिरी पल के बाद के पहले पल को तलाश करने मे,
    जँहा भी एक पल को खोज के देखा तो अगले पल के होने का अहसास दे गया,
    आखिरी एक पल जहॉ तक तलाश किया एक पल को, वो एक पल बढता ही चला गया,
    जहॉ तक भी उस पल मे उस एक पल की तलाश की, ना जाने कितना बडा लगा,
    मगर ना जाने कितने एक-एक पल आगे जाके देखा,
    उस पल के होने का एहसास तो मिला मगर वो पल फिर भी ना मिला,
    अब मानुष सोच रहा कैसे करू तलाश, उस एक पल के बाद के पल का रहस्य क्या है,
    उस एक पल के बाद का आश्चयॅ, वो पल ना मिले ना सही ये तो पता चले क्या है,
    उस एक आखिरी पल के बाद घटने वाले पहले पल का रहस्य,
    यही सोचकर दिया कदम बढाऐ, उस आखिरी पल मे फिर भी रहस्य का रहस्य ही रह गया,
    आखिरी पल भी मिल गया और उसके बाद का पहला पल भी मिल गया,
    मगर फिर तलाश अधुरी की अधुरी रह गयी,
    उस आखिरी एक पल और पहले एक पल के बीच वो पल फिर रह गया,
    कैसे करू तलाश कैसे देखु उस पल को जो दोनो के बीच आया तो सही मगर आकर चला गया,
    देखकर भी नही देखा वो पल आया भी और आकर चला भी गया,
    अगर ए मानुष तु मानता है ये सवाल है,
    तो दोनो के बीच ठहर जा, वही तुझे वो पल मिलेगा,
    जिसमे गति दिखाई देती है मगर होती नही,
    यही वो फैसले की घङी है जब तुझे उस पल मे फैसला करना है,
    जो दोनो के बीच तु खङा है यही सवाल है यही जवाब है, ना समझे वो अनाङी है,
    आखिरी पल मे फैसला कर ले रूककर बीच मे जाना है,
    फिर जो तु देखना चाहे वही पल पहला पल हो, ये फैसला तु बीच मे खङा होकर कर ले,
    जिस पल को तु चुन ले, वही तेरा पहला पल हो,
    इस घाटी मे उतरने को कितने है बेताब,
    मगर जान ले ए मानुष कितना आसान और कितना मुश्किल है,
    ये आखिरी पल और पहले पल के बीच पल का स्थान,
    उस पल पर पहुचने के वास्ते तुझे होना होगा दुर आखिरी और पहले पल से,
    दोनो की दुरी को बॉटना होगा, बॉटते ही दुरी दोनो के बीच की हो जाएगा तु दोनो के बीच,
    वही खङे होकर तुझे लेना है फैसला कौन सा हो तेरा अगला पहला पल,
    जान ले तु खङा नही होगा और खङा भी होगा, जब तु होगा खङा उन दोनो पल के बीच,
    होगा सभी एक-एक पल मे, मगर दोनो पलो को बॉट देना होगा तुझे बीचो-बीच,
    टुट जाएगा नाता तेरा सबसे कुछ पल कहो या वो एक पल जिसमे तु होगा सभी से दुर,
    वही जाकर लेना होगा अगले पहले पल कहा होना चाहता है तु,
    नही कर सकेगा जब तक तु ये सब करना है बैकार,
    नही कभी ये जान सकेगा दोनो एक पल के बीच का सच,
    और किसी भी तरह ना तु समझ पाएगा उस पल का सच,
    जो पहुचेगा वही जान पाएगा उस पल का सच,
    वो भी इतना ही वो एक आखिरी पल भी था और ये पहला पल भी है,
    फिर भी गुप्त रह जाएगा वो दोनो के बीच,
    छुट गया वो पल पकङ लो उसको,
    जिसे पकङकर पार उतर गये साधु सन्त और फकिर,
    मानुष देखता रह गया वो निकल गये बीचो-बीच बे रॅग !!
    --------------------------------------------------------------------------

    ReplyDelete
  3. kalki ko mmmec me ek student ne ghar me band rahne ka shraap diya tha. agar wah vyakti kalki(shishir mishra) se milkar maafi nahi maangega to agle janm me keeda banega.

    ReplyDelete
  4. kalki sadachari logo ka param mitra hai.

    ReplyDelete
  5. kalki sadachari logo ka param mitra hai.

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

आखिर ये राम-नाम है क्या ?..........!! ( DR. PUNIT AGRWAL )

मनुवाद के विरोधियो पहले पढ़ो फिर विरोध करो !! - सूबेदार जी पटना