Wednesday, September 11, 2013

" मेरे परम मित्र - पुण्य प्रसुन वाजपेयी जी का एक अहम् लेख आपसे बाँट रहा हूँ जी अवश्य पढ़िए और अपने अनमोल विचारों से हमें अवश्य अवगत करवाएं " ! !!

पुण्य प्रसून बाजपेयी



Posted: 09 Sep 2013 10:04 AM PDT

पहली बार रामलीला मैदान से एक नये इतिहास को रचने की कवायद चल रही है, जिस पर निर्णय तो बीजेपी को लेना है लेकिन कवायद संघ परिवार कर रहा है। यह कवायद नरेन्द्र मोदी को लेकर है। प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर मोदी के नाम का ऐलान अगर बीजेपी की एकजुटता और जनता की शिरकत के साथ रामलीला मैदान में रैली के साथ हो तो फिर चुनाव के मोड में समूचा देश भी आ जायेगा और बीजेपी के साथ साथ संघ परिवार भी चुनावी शिरकत शुरु कर देगा। संघ की मोदी को लेकर जो बिसात है उसके मुताबिक संसदीय बोर्ड में मोदी पर सर्वसम्मती से ठप्पा लगे।

यानी कोई नेता रुठा हुआ ना लगे। खास तौर से आडवाणी, सुषमा, मुरली मनोहर जोशी और अनंत कुमार खुले दिल से मोदी के साथ जुड़ें। और चुंकि इसके तुरंत बाद मोदी पूरी तरह से चुनावी कमान संभालेंगे तो उन्हें देश के लीडर के तौर पर रखने के लिये रामलीला मैदान में सबसे बडी और भव्य रैली हो। जिसमें खुले तौर पर मोदी के नाम का प्रस्ताव लालकृष्ण आडवाणी रखे। और सेकेंड सुषमा स्वराज करें। और फिर वह तमाम नेता मोदी के पक्ष में खुलकर आये जो अभी तक मोदी के नाम पर रुठे हुये नजर आते रहे हैं। आरएसएस रामलीला मैदान की रैली पर इसलिये भी जोर दे रहा है क्योंकि वह मनमोहन सरकार को उसी तर्ज पर चुनौती देना चाहता है जैसी चुनौती जेपी ने 1975 में दी थी।


महत्वपूर्म है कि 1975 में जेपी के संघर्ष के साथ आरएसएस खड़ी थी। और 25 जून 1975 को जेपी ने गिरफ्तारी से पहले रामलीला मैदान में ही ऐतिहासिक रैली की थी। जिसमें लाखों लोग जुटे थे। संघ का मानना है कि बीजेपी को भी मोदी की अगुवाई में उसी तरह के संघर्ष की मुनादी रामलीला मैदान से करनी होगी। तभी देश में बदलाव की बयार तेजी से बहेगी और लोगों का जुड़ाव भी तेजी से शुरु होगा। यानी सरसंघचालक मोहन भागवत अर्से बाद 1975 में सरसंघचालक रहे देवरस की उसी राजनीतिक लकीर पर चलना चाह रहे हैं, जिसपर देवरस ने चलकर पहली बार स्वयंसेवकों को सत्ता तक पहुंचाया था और तब जेपी खुले तौर पर यह कहने से नहीं चुके थे थे कि अगर आरएसएस सांप्रादायिक है तो वह भी सांप्रदायिक हैं। और उसी इतिहास को मोदी के जरीये दोहराने के मूड में संघ है।

सवाल सिर्फ इतना है कि तब जंनसंघ संघ के इशारे पर थी और इस बार संघ को लेकर बीजेपी के भीतर अब भी गहरी खामोशी है। लेकिन जिस तरह बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने संघ के साथ बैठक में चुनावी तैयारी का खाका रखा उसने अगर मोदी के अगुवाई में बीजेपी की तैयारी खुल कर बतायी तो भैयाजी जोशी ने बीजेपी के हर नेता के भाषण के उस अंश को पकड़कर बीजेपी के चुनावी मैनिफेस्टो का खांका रखा जो संघ के एजेंडे हैं। और बैठक में अर्से बाद धारा 370 और कामन सिविल कोड़ को लेकर राजनीतिक चर्चा खुले तौर पर हुई। तो बीजेपी एक बार फिर संघ की उस लकीर पर चलने की तैयारी कर रही है जिस लकीर को सत्ता पाने के लिये एनडीए तले उसने छोड़ दिया था। असल में बीजेपी के दिल्ली बैठे नेताओं को आरएसएस हर मुद्दे पर खंगाल रही है और मोदी के जरीये अपने स्वप्न को राजनीतिक साकार देने में लगी है। और इसके लिये बीजेपी से ज्यादा राजनीतिक तैयारी संघ परिवार कर रहा है।

संघ ने तीन स्तर पर काम शुरु किया है। पहला संघ के पुराने लोगो को भी चुनावी मिशन में जोड़ना। दूसरा, बीजेपी की जीत का जमीनी आकलन करना और तीसरा मोदी का नाम खुले तौर पर प्रचारिक करना और इस रणनीति को अमल में लाने के लिये संघ ने बकायदा पूरे देश में हर उस वोटर तक पहुंचने की कवायद शुरु कर दी है जो कभी ना कभी किसी ना किसी रुप संघ से जुड़ा रहा हो। चाहे दानपत्र में दस रुपये दान करने वाला व्यक्ति हो या किसी प्रकार की दीक्षा लेने वाला शख्स। संघ ने यूपी,बिहार , राजस्थान और मध्यप्रदेश में पंचायत स्तर पर तो देश के बाकि राज्यों में जिले स्तर पर संघ से जुडे लोगो की निशानदेही शुरु की है। इतना ही संघ के प्रति साफ्ट रुख रखने वालो को काम का ऑफर भी किया जा रहा है। और इस काम में बूथ संभालने से लेकर अपने क्षेत्र के लोगो को मोदी के हक में वोट डालने के लिये प्रोत्साहित करना तक है। संघ का खास जोर उन 298 सीटों को लेकर है जिसपर बीते 33 बरस में बीजेपी जीती है।

यानी बीजेपी के बनने के बाद वह जिस भी सीट पर जीती वहा दोबारा जीत मिल सकती है इसे संघ मान रहा है। खास बात यह है कि पीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर अभी तक चाहे मोदी के नाम का ऐलान नहीं हुआ है लेकिन संघ परिवार ने मोदी का नाम लेकर पुरानी संघियों को समेटना शुरु कर दिया है। और संघ के प्रति साफ्ट रुख रखने वालों को यह साफ कहा जा रहा है कि इस बार मोदी को वोट देना हैं। असल में संघ उन विवादास्पद मुद्दों पर भी इसबार समझौता नहीं करना चाहता है, जो एनडीए की सत्ता बनने के दौरान बीजेपी ने ठंडे बस्ते में डाल दिये थे। इसीलिये बैठक में गडकरी ने अयोध्या से लेकर कामन सिविल कोड और संघ के गउ मुद्दे से लेकर धारा 370 की राजनीतिक जरुरत पर भाषण दिया। और इसे दुबारा बीजेपी के चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा कैसे बनाये इसपर भैयाजी जोशी ने अपना मत बताया। यानी संघ को पहली बार लगने लगा है कि अगर बीजेपी समेत संघ परिवार एकजुट हो नरेन्द्र मोदी के पीछे जा खड़ा हो तो 300 सीट पर जीत मिल सकती है। यानी पहली बार स्वयंसेवक को संघ के एजेंडे पर सत्ता मिल सकती है।
                        
                                                                       
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Posted by PD SHARMA, 09414657511 (EX. . VICE PRESIDENT OF B. J. P. CHUNAV VISHLESHAN and SANKHYKI PRKOSHTH (RAJASTHAN )SOCIAL WORKER,Distt. Organiser of PUNJABI WELFARE SOCIETY,Suratgarh (RAJ.)

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