" इक तारा बोले , तुन-तुन , क्या कहे ये हमसे सुन- सुन "..........????

" तुनक-तुनक " कर बोलने वाले सभी मित्रों को मेरा हार्दिक प्रणाम !!
                       हमारे भारत में कई तरह की सभ्यताएँ बसती हैं !! सब अपने आपको श्रेष्ठ बताते हैं !! सबको अपना इतिहास , खान-पान , रहन-सहन और जीवन का ढंग इतना बढ़िया लगता है की पूछो मत जी , सब अपने मुंह मियाँ-मिठ्ठु बनते नहीं थकते , और साथ-साथ ये भी चाहते हैं की दुसरे भी उन जैसे ही बन जाएँ !!
                              यही हाल आजकल सभी राजनितिक दलों का भी हो गया है !! सब अपनी प्रशंसा करने में ही लगे हुए हैं !! जनता से कोई नहीं पूछ रहा की उसे कौन " भा " रहा है !! उसे तो बस एक हाथ से  आश्वासनों की थालियाँ परोसी जा रही हैं !! तो दुसरे हाथ से मतदाता के हाथ से " विकल्प " छीने जा रहे हैं !!
                               ज़माना कहता था कि भगवान् की मर्ज़ी के बिना पत्ता भी नहीं हिल सकता , लेकिन आज लगता है जैसे " नेताओं " की मर्ज़ी के बिना कोई समाजसेवी भी नहीं बन सकता !! " नक्रात्मकता " ज़हन में घर करती जा रही है !! सकारात्मकता आ ही नहीं पा रही इस जीवन में , लाख कोशिशों के बावजूद आँखों के सामने " तारे घुमते " दिखाई से पड़ते हैं !!
                   जो भी सज्जन पुरुष-महिला इस समाज को सुधरने हेतु अपने घर से निकलती या निकलता है ,या तो उसे डरा धमका कर बैठा दिया जाता है नहीं तो कत्ल कर दिया जाता है !! आदमी तो चोदिये जनाब देश की सुधारक संस्थाओं तक को नहीं बख्शा जा रहा , उन्हें भी कहा जा रहा है की नेताओं से डरना सीखो !!
                     कब तलक चलेगा ये सब !!??? या यूं कंहें कि कब से चलता आ रहा है ये सब ??? जब से सृष्टी की रचना हुई है तभी से ये धक्केशाही चलती आ रही है जी !!  आइये हमारे ग्रंथों पर अपनी सरसरी नज़र दौडाते हैं ..........:-
                           शंकर जी के ससुर अपने दामाद जी को इसलिए पसंद नहीं करते थे की वो जंगलों में रहते थे , उन जैसे महलों में रहने वाले नहीं थे !!! दक्ष प्रजापति ने लाख कोशिशें की उन्हें अपने जैसा बनाने की !! ह्रिन्याक्ष ने प्रहलाद को अपने जैसा बनाना चाहा तो रावन ने सीता जी को अपनी सभ्यता अनुसार ढालना चाहा !!!! यानी अमीर का घमण्ड गरीब पर हमेशां से हावी होने की कोशिश में रहता है !!


                         भगवान् जी को देखलो !! भक्तों हेतु तो वो कड़ी तपस्या के बाद या कड़ी परीक्षा के बाद आये हैं , वन्ही राक्षसों हेतु पापियों हेतु जल्दी प्रकट हुए हैं !!
                   तो भैया जी और बहनों जी , मुझे तो मनोज कुमार जी की फिल्म " यादगार " का एक गीत याद आ रहा है , जिसमे वो कहते हैं कि " इक तारा बोले , क्या कहे ये तुमसे , बात है लम्बी - मतलब गोल , खोल ना दे ये सब की पोल , तो फिर उसके बाद...!!!!!
                            प्रिय मित्रो , सादर नमस्कार !! आपका इतना प्रेम मुझे मिल रहा है , जिसका मैं शुक्रगुजार हूँ !! आप मेरे ब्लॉग, पेज़ , गूगल+ और फेसबुक पर विजिट करते हो , मेरे द्वारा पोस्ट की गयीं आकर्षक फोटो , मजाकिया लेकिन गंभीर विषयों पर कार्टून , सम-सामायिक विषयों पर लेखों आदि को देखते पढ़ते हो , जो मेरे और मेरे प्रिय मित्रों द्वारा लिखे-भेजे गये होते हैं !! उन पर आप अपने अनमोल कोमेंट्स भी देते हो !! मैं तो गदगद हो जाता हूँ !! आपका बहुत आभारी हूँ की आप मुझे इतना स्नेह प्रदान करते हैं !!नए मित्र सादर आमंत्रित हैं !!                              प्रिय मित्रो , आपका हार्दिक स्वागत है हमारे ब्लॉग पर " 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER " the blog . read, share and comment on it daily plz. the link is - www.pitamberduttsharma.blogspot.com., गूगल+,पेज़ और ग्रुप पर भी !!ज्यादा से ज्यादा संख्या में आप हमारे मित्र बने अपनी फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज कर !! आपके जीवन में ढेर सारी खुशियाँ आयें इसी मनोकामना के साथ !! हमेशां जागरूक बने रहें !! बस आपका सहयोग इसी तरह बना रहे !! मेरा इ मेल ये है : - pitamberdutt.sharma@gmail.com. मेरे ब्लॉग और फेसबुक के लिंक ये हैं :- www.facebook.com/pitamberdutt.sharma.7
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आपका प्रिय मित्र ,
पीताम्बर दत्त शर्मा,
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जिला-श्री गंगानगर।
                  
                              

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