" आओ तुम्हें ," मैं " प्यार सिखादूं , सिखला दो - ना " ...!!!!!

  "प्यार करना" सीख चुके,मेरे सभी मित्रों को  मेरा  सादर प्रणाम !! हिंदी सिनेमा का एक गीत था कि...                                                                                                    " आओ तुम्हें ," मैं " प्यार सिखादूं , सिखला दो - ना " ...!!!!! जो बहुत प्रसिद्ध हुआ था ! आज मुझे अपने देश में इस " रस " की बड़ी कमी सी महसूस हो रही है ना जाने क्यों......!! तुलसी दास जी रामायण में कह गए हैं कि " कलयुग केवल नाम अधारा , सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा !! फेसबुक, ट्विटर के जमाने में प्यार के नाम तो हैं,लेकिन सच्चा प्यार कंही नज़र ही नहीं आता !! 
                          मेरे एक प्रिय मित्र डा. पुनीत अग्रवाल जी ने पति-पत्नी के प्यार पर एक कविता लिखी है ......आप भी पढ़िए ज़रा....
               थोड़ा मुसकुरा ले----कम से कम तू तो बिक लेती----150012
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थोड़ा मुसकुरा ले।
परेशान पति ने पत्नी से कहा –
‘एक मैं हूं जो तुम्हें निभा रहा हूँ
लेकिन अब,
पानी सर से ऊपर जा चुका है
इस लिये ‘आत्म-हत्या’ करने जा रहा हूँ।’
पत्नी बोली – ‘ठीक है,
लेकिन हमेशा की तरह
आज मत भूल जाना,
और लौटते समय
दो किलो आटा जरूर लेते आना।

पत्नी ने पति से कहा — ‘तुम रोज-रोज
नदी में छलांग लगाने की कहते हो
लेकिन आज तक तुमने छलांग लगाई? ‘
पति बोला — चेलैंज मत कर
वरना करके दिखा दूंगा,
अभी मैं तैरना सीख रहा हूँ
जिस दिन आ जाएगा
छलांग भी लगा दूंगा।’

पति बोला — अगर तू
इतनी ही परेशान है
तो मुझे छोड़ क्यों नहीं देती,
ये पति-पत्नी का रिश्ता
तोड़ क्यों नही देती।
पत्नी बोली — इतनी जल्दी भी क्या है
मेरे साजन भोले,
पहले तेरी सारी संपत्ति
मेरे नाम तो हो ले।

पत्नी ने सुबह-सुबह पति को जगाया
पति बड़बड़ाया –
‘दो मिनट बाद नहीं जगा सकती थी
ऎसी भी क्या जल्दी थी
कितना अच्छा सपना दिख रहा था,
राजा हरिस्चन्द्र बना मैं और मेरा परिवार
चौराहे पर बिक रह था।’

पत्नी बोली — ‘फिर,
दो मिनट में वहां कौनसी तुम्हारे लिए
रोटी सिक लेती,’
वह बोला — बेवकूफ,
रोटी सिकती या न सिकती
पर दो मिनट में
कम से कम तू तो बिक लेती।

                                                                                         तो मित्रो !! सबसे सच्चा प्यार तो   केवल माता और पुत्र का माना गया है !! लेकिन उसमें भी आजकल मिलावट पैदा हो गयी है !! किया क्या जाए .......???? आजकल तो बस फरेब ही फरेब रह गया है !! एक और मशहूर गीत की दो पंक्तियाँ याद आ रहीं हैंकि............." कसमे वादे, प्यार वफ़ा, सब बातें हैं , बातों का क्या ??? कोई किसी का नहीं है , ये झूठे, नाते हैं नातों का क्या......???????प्रिय मित्रो, आपका क्या कहना है ...इस विषय पर ......???? अपने विचार आप मेरे ब्लॉग पर , जिसका नाम है..:- " 5th pillar corrouption killer " जाकर लिख सकते हैं !! जिसको खोलने का लिंक ये है...
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