Wednesday, November 20, 2013

साभार !! पत्रकारिता का संकटकाल नहीं, संपादकों और पत्रकारों का संकटकाल.......!!


-दिलीप सी मंडल||
यह पत्रकारिता का संकटकाल नहीं है. यह संपादकों और पत्रकारों का संकटकाल है. उन महान संपादकों का दौर गया जो गलत खबर दिखाकर दंगा करा पाते थे, छात्रों को आत्मदाह के लिए उकसा पाते थे, जो यह दंभ पाला करते थे कि वे सरकारें बना और बिगाड़ सकते हैं.journalism
प्रिंट और टीवी मीडिया में आई बहुलता तथा सोशल मीडिया और इंटरनेट के विस्फोट ने पत्रकारिता को सूचनाओं और समाचारों के लाखों स्रोतों के दौर में पहुंचा दिया है. अब प्रश्न यह नहीं है कि पत्रकार कौन है, बल्कि सवाल यह है कि पत्रकारिता कौन कर रहा है. अगर आप सूचनाएं और समाचार लोगों तक पहुंचा रहे हैं, तो आप पत्रकारिता की नौकरी न करते हुए भी पत्रकार हैं.
अब लागों के पास सच जानने के सैकड़ों-हजारों तरीके हैं. पाठक और दर्शक लगातार सीख रहा है और मैच्योर हो रहा है कि विश्वसनीय समाचार कहां से ले. पत्रकारों के लिए विश्वसनीय बने रहने और विश्वसनीय दिखने की गंभीर चुनौती है.
खासकर इसलिए भी कि मीडिया की आंतरिक संरचनाएं और इसके अपने खेल-तमाशे अब लोक-विमर्श के दायरे में हैं. लोग यह मीमांसा करने लगे हैं कि ऐसी खबर क्यों दिखाई जा रही है और कोई खबर क्यो नहीं दिखाई जा रही है.
मीडिया निरक्षरों के युग के अंत का अर्थ, तथाकथिक महान संपादकों के युग का अंत भी है.
(दिलीप सी मंडल की फेसबुक वाल से)
किस ओर जा रहा है पत्रकारिता का भविष्य…-प्रदीप राघव||
मैं बदला, तुम बदले, समाज बदला, और तो और आधुनिक युग में लोगों की मानसिकता तक बदली तो भला पत्रकारिता क्यों ना बदलती. कुर्ता पायजामा पहने, दाढी बढ़ाए, माथे पर अजीब सी शिकन, हाथ में झोला लिए एक साहब से मुलाकात हुई. मैं उन्हें देखकर ही भांप गया कि वो एक पत्रकार हैं. क्योंकि मैंने माखनलाल चतुर्वेदी जैसे बड़े-बड़े पत्रकारों के बारे में पढ़ा है और अच्छी तरह सुना भी.
आजकल के दौर में इस तरह के पत्रकारों को ढूंढना बेवकूफी से कम नहीं क्योंकि इस तरह के पत्रकार आजकल होते ही नहीं. कौन कम्बख्त आजकल दाढी बढ़ाना, हाथ में झोला लेना और खादी का कुर्ता-पायजामा पहनना पसंद करता है. खैर, मैं उन भाईसाहब से पूछ बैठा, क्यूं मियां आप पत्रकार है ना. गर्दन हिलाते हुए कहने लगे, चलो कोई तो है जो हमें पहचानता है, वरना आजकल तो लोग हमें भिक्षु समझ लेते हैं. मैं हंसने लगा और कहने लगा ,ऐसी बात नहीं है पत्रकार साहब. पत्रकारों की तो आजकल
बहुत वेल्यू होती है. हां, टेलीविजन और प्रिंट की पत्रकारिता में जरूर कुछ फर्क दिखाई पड़ता है. टेलीविजन में वो लोग चेहरे पर क्रीम-पाउडर पोतकर स्टूडियो में बैठ समाचार पढ़ते हैं जबकि अखबार के पत्रकार गली-कूचों में जाकर लोगों की मानसिकता का जायजा लेते हैं. दरअसल आजकल समाचार चैनल टीआरपी की होड़ में कुछ अनाप-शनाप चीज़ें परोस जाते हैं. तो मेरी नजर में तो आप ही उन लोगों से श्रेष्ठ हैं.
वो जोर-जोर से हंसने लगे, कहने लगे बस मियां इतनी तारीफ काफी है. कुछ देर और गुफ्तगूं हुई फिर हम लोग अपने-अपने गंतव्य को चल दिए. दरअसल वो एक बहुत पुराने अख़बार के पत्रकार थे चूंकि टेलीविजन की पत्रकारिता से कहीं ज्यादा सहूलियत रखने वाली प्रिंट की पत्रकारिता है क्योंकि यहां ब्रेकिंग न्यूज़ नामक समाचार चैनलों का दीमक नहीं होता लेकिन आधुनिक युग में हो रहे बदलावों की झलक अब प्रिंट मीडिया में
भी दिखाई पड़ती है हालिया कुछ घटनाओं से आप इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं. हालांकि गंदगी सभी जगह पर है टेलीविजन के पत्रकारों पर लगे कलंकों से इस बात की पुष्टि होती है. वैसे भी आधुनिक दौर में अगर आपको अच्छे पत्रकारों की झलक दिखाई देगी तो वो भी थोड़ी बहुत प्रिंट मीडिया में न कि इलेक्ट्रॉनिक में. आधुनिक युग में पत्रकारिता में अनेकों बदलाव हुए हैं. रामनाथ और माखनलाल जी जैसे उस दौर में बहुत से अच्छे पत्रकार थे जबकि आजकल ऐसे पत्रकार ढूंढे से भी नहीं मिलते जो कहीं पर किसी भी ऐसी श्रेणी में आते हों.
हालांकि प्रिंट के भी बहुतेरे पत्रकारों का नाम इनमें शामिल है. इन बातों से ऐसा प्रतीत होता है कि कहीं ना कहीं पत्रकारिता का भविष्य अंधेरे की ओर जरूर जा रहा है. जिस तरह से हर जगह हुए बदलावों ने आम आदमी की जिंदगी को आसान बना दिया है क्या उसी प्रकार पत्रकारिता में हो रहे नए-नए बदलाव पत्रकारिता को उज्जवल भविष्य की ओर ले जा रहे हैं या फिर अंधेरे की ओर ढकेल रहे हैं.
(लेखक इलेक्ट्रोनिक मीडिया से जुड़े पत्रकार हैं)
                                       " आकर्षक - समाचार ,लुभावने समाचार " आप भी पढ़िए और मित्रों को भी पढ़ाइये .....!!!
BY :- " 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER " THE BLOG . READ,SHARE AND GIVE YOUR VELUABEL COMMENTS DAILY . !!
प्रिय मित्रो , सादर नमस्कार !! आपका इतना प्रेम मुझे मिल रहा है , जिसका मैं शुक्रगुजार हूँ !! आप मेरे ब्लॉग, पेज़ , गूगल+ और फेसबुक पर विजिट करते हो , मेरे द्वारा पोस्ट की गयीं आकर्षक फोटो , मजाकिया लेकिन गंभीर विषयों पर कार्टून , सम-सामायिक विषयों पर लेखों आदि को देखते पढ़ते हो , जो मेरे और मेरे प्रिय मित्रों द्वारा लिखे-भेजे गये होते हैं !! उन पर आप अपने अनमोल कोमेंट्स भी देते हो !! मैं तो गदगद हो जाता हूँ !! आपका बहुत आभारी हूँ की आप मुझे इतना स्नेह प्रदान करते हैं !!नए मित्र सादर आमंत्रित हैं !!HAPPY BIRTH DAY TO YOU !! GOOD WISHES AND GOOD - LUCK !! प्रिय मित्रो , आपका हार्दिक स्वागत है हमारे ब्लॉग पर " 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER " the blog . read, share and comment on it daily plz. the link is - www.pitamberduttsharma.blogspot.com., गूगल+,पेज़ और ग्रुप पर भी !!ज्यादा से ज्यादा संख्या में आप हमारे मित्र बने अपनी फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज कर !! आपके जीवन में ढेर सारी खुशियाँ आयें इसी मनोकामना के साथ !! हमेशां जागरूक बने रहें !! बस आपका सहयोग इसी तरह बना रहे !! मेरा इ मेल ये है : - pitamberdutt.sharma@gmail.com. मेरे ब्लॉग और फेसबुक के लिंक ये हैं :- www.facebook.com/pitamberdutt.sharma.7
www.pitamberduttsharma.blogspot.com
मेरे ब्लॉग का नाम ये है :- " फिफ्थ पिलर-कोरप्शन किल्लर " !!
मेरा मोबाईल नंबर ये है :- 09414657511. 01509-222768. धन्यवाद !!
आपका प्रिय मित्र ,
पीताम्बर दत्त शर्मा,
हेल्प-लाईन-बिग-बाज़ार,
R.C.P. रोड, सूरतगढ़ !
जिला-श्री गंगानगर।

Posted by PD SHARMA, 09414657511 (EX. . VICE PRESIDENT OF B. J. P. CHUNAV VISHLESHAN and SANKHYKI PRKOSHTH (RAJASTHAN )SOCIAL WORKER,Distt. Organiser of PUNJABI WELFARE SOCIETY,Suratgarh (RAJ.)

No comments:

Post a Comment

"मीडिया"जो आजकल अपनी बुद्धि से नहीं चलता ? - पीताम्बर दत्त शर्मा {लेखक-विश्लेषक}

किसी ज़माने में पत्रकारों को "ब्राह्मण"का दर्ज़ा दिया जाता था और उनके कार्य को "ब्रह्मणत्व"का ! क्योंकि इनके कार्य समाज,द...