"मौजूदा मानवीय-आधार"का ये चेहरा देख कर,इस देश की किस्मत पर रोना आता है " साहेब "!!?- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक )

कितना सुन्दर शब्द है ये "मानवीय-आधार" ? मन गद-गद हो उठता है इसे सुन कर ! जब भी ये शब्द हमारे कानों में सुनाई पड़ता है , तब ऐसे लगता है जैसे हमारे "जीवन-आधार" अभी जीवित हैं ! ये लेखक-कवि और पत्रकार लोग ऐसे ही शोर मचाये रहते हैं कि मानवता खत्म हो गयी और घोर कलयुग आ गया आदि-आदि  क्या-क्या कहते रहते हैं ??
          हमारे संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी एक "मानव-अधिकार-आयोग"बना रख्खा है , जिसकी शाखाएँ लगभग हर बड़े देश में हैं !ये साधारण आदमी को कब और कैसे मदद पंहुचाते हैं,ये तो आम-आदमी को पता नहीं चलता,लेकिन इनके स्वयं-सेवक कब इस पुण्य कार्य की आड़ में कब कहीं धरना-प्रदर्शन करते हैं , वो अवश्य पता चल जाता है ! या फिर ये घनघोर अपराधियों का बचाव करते दिखाई दे जाते हैं !
              इन्हीं से प्रेरित होकर और कुछ अपने निजी रिश्तों के चलते भारत की विदेश मंत्री ने एक महिला के आपरेशन हेतु उसके पति को उसके पास होने के लिए, वहाँ जाने की इजाज़त क्या दिलवादी ? एक "आस्तीन के सांप"ने विपक्षी लीडरों के साथ मिलकर ऐसा हंगामा खड़ा करवा दिया कि हमारे प्रधानमंत्री जी तक दोषारोपण होने लगे और त्यागपत्र की मांग भी "रिवाज़" मुताबिक कर दी गयी !लेकिन उसी के कारण जब हमारी विदेश मंत्री जी भारी मुसीबत में फंस गयीं हैं तो वो ललित मोदी भारत आकर उसके खिलाफ मामलों में अपनी सफाई नहीं दे रहा ! बल्कि विदेश में एक समुन्दर के किनारे बैठ कर अपने घनिष्ठ मित्र राजदीप को इंटरव्यू देकर कह रहा है कि मैं क्यों जाऊं भारत ? मैं यहीं बैठकर केस लड़ूंगा और निर्दोष साबित होऊंगा ! क्योंकि घनिष्ठ संबन्ध दोषी के तो सभी राजनितिक दलों के साथ हैं ही !क्योंकि क्रिकेट की दाल सब में बराबर-बराबर बंटती है, माननीय मंत्री जी और उस आस्तीन  सांप के भी संबंध सब से अच्छे हैं !इसलिए किसी का कुछ भी नहीं बिगड़ेगा इस खेल में देख लेना ! जो मीडिया मजे ले-लेकर स्टोरियाँ दिखा रहा है वो भी इनके साथ मिला हुआ है जी !
             मानवीय-आधार और मानव-अधिकार आजकल बचे ही कहाँ हैं ?शिक्षक को भगवान के बराबर दर्ज़ा दिया गया था हमारी संस्कृति में , लेकिन वो भी आजकल व्यापारी हो गया है ! अकेला शिक्षक ही नहीं जी , चिकित्सक,नेता,पत्रकार और सभी रिश्तेदार भी बड़े व्यापारी ही बन गए हैं !सब आधार चौपट हुए पड़े हैं जी !है  कि नहीं ??जिसको मानवीय आधार पर मदद मिलनी चाहिए उसे तो सभी भाषण सुनाकर ही संतुष्ट करना चाहते हैं !और जो चंडी के चम्मच लेकर ही पैदा हुए हैं उन्हें सब प्रकार की मदद दी जा रही है ! वाह रे तेरा न्याय ??आज मीडिया इस बात पर बहस करता नज़र नहीं आ रहा कि मानवीय आधार पर मदद का "पात्र-सुपात्र" कौन हो ? वो तो बस अंसल लगाकर अपनी दुकान चला रहा है !
          अब आप ही निर्णय कीजिये "साहिब"(प्रधनमंत्री जी)कि इस देश में क्या-क्या तुरन्त बदलना चाहिए ??सारे सांसदों , विधायकों,मंत्रियों,विशेषज्ञों,सचिवों को लेकर एक संयुक्त अधिवेशन इतना लम्बा चलाइए जिसमे सभी प्रकार के बदलाव और ठोस उपाय कर दिए जाएँ !ताकि असमंजस की स्थिति की वजह से अब कोई दुश्मन अपनी चाल ना चल सके !! जय-हिन्द !! 
         


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आपका अपना - पीताम्बर दत्त शर्मा -(लेखक-विश्लेषक), मोबाईल नंबर - 9414657511 , सूरतगढ़,पिनकोड -335804 ,जिला श्री गंगानगर , राजस्थान ,भारत !
 

Comments

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 18 - 06 - 2015 को चर्चा मंच पर नंगी क्या नहाएगी और क्या निचोड़ेगी { चर्चा - 2010 } पर दिया जाएगा
    धन्यवाद

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  2. सामायिक लेख बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करते हुए , बेहतरीन अभिब्यक्ति

    कभी इधर भी पधारें

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