Wednesday, September 12, 2012

" जाइए जी,आप हमें पसंद नहीं " !!

 "प्यारे दुलारे और न्यारे मित्रो,"नमस्कार !!
            कभी ये नेता भी हमें आप की तरह पसंद थे ! प्यारे,दुलारेऔर हमारे थे !! लेकिन पता नहीं इनको क्या हो गया है, राम ही जाने !! कोई कहता है कि नेता सुधरेंगे तो देश सुधरेगा,तो कोई बोलता है की पहले तुम सुधरो तो देश सुधरेगा !! हम तो क्या हमारे बजुर्गों को भी लोग " भला-शरीफ " बोलते और मानते हैं !!फिर भी ये देश क्यों नहीं सुधरा ???? क्यों ज्यादातर लोग बेईमान हैं !! कंही ये सुधरने वाली बात, बेईमानी करने वालों की चाल तो नहीं ???ये धर्म,पुण्य,दान,पूजा और क्रियाक्रम इन्ही की तो चाल नहीं ????????
                अबकी बार जो भी नेता वोट मांगने आएगा तो, मैं तो बोल दूंगा कि जाइए जी, आप हमें पसंद नहीं !!लेकिन फिर सोचता हूँ कि मेरे एक के ऐसा बोल देने से क्या होगा ??? कोई दूसरा शराब पीकर, पैसे लेकर,जाती देख कर या धर्म-पार्टी देख कर इन्ही लोगों को जीता देंगे, तो मुझ जैसे " शरीफों " का क्या होगा ???? इसलिए एक पुराना गीत याद आ रहा है कि....
 " तेरी दुनिया में दिल लगता नहीं, वापिस बुला ले .....!!!!
                " कैन्हैया-कैन्हैया तुझे आना पड़ेगा, "वचन"गीता वाला निभाना पड़ेगा" !!
                  आजकल पार्टियों के ये काम रह गए हैं :-  

      वामपंथी संगठन ने JNU परिसर में गाय के मांस की पार्टी का आयोजन किया है , शायद इस आयोजन में अम्बेडकरवादी भी शामिल हैं |पिछले साल अक्तूबर में भी JNU में एक वामपंथी छात्र संगठन ने महिषासुर की पूजा का आयोजन किया था | गाय का मांस खाने से कौन सी क्रांति घट जायेगी या समाज में ऐसा कौन सा परिवर्तन गाय का मांस खाए बगैर नहीं होने वाला है या ऐसी समाज में कौन सी विषमता है जो गाय का मांस खाने से ही दूर होगा ? गाय का मांस तो आधी दुनिया खा रही है , अपने देश में भी बहुत लोग खाते हैं , सभी मुसलमान खाते हैं क्या यह माना जाए की गाय का मांस खाने वोलों में आर्थिक व् सामजिक गैरबराबरी खत्म हो गई ? नहीं , गाय के मांस की पार्टी का आयोजन प्रगतिशीलता और बौद्धिकता की आड़ में वामपंथियों की खेमाबन्दी है , सुर्खियाँ बटोरी जा रही है , अपने आकाओं के समक्ष अपने नम्बर बनाए जा रहे है | अगर वामपंथी छात्र संगठन सचमुच में ब्राह्मणवादी व्यवस्था के खिलाफ कुछ करना चाहते हैं तो सबसे पहले इन्हें कम्युनिस्ट पार्टियों में वर्षों से शीर्ष नेत्रत्व पर कब्ज़ा जमाए सवर्णों के खिलाफ ही मोर्चा खोलना चाहिए | कोई ताजुब की बात नहीं अगर कल यही वामपंथी छात्र संगठन प्रगतिशीलता , बौद्धिकता के नाम पर मल मूत्र भी खाने लगे | आप भी अपने विचार बताइए......!! " 5th pillar corrouption killer " the link is :- www.pitamberduttsharma.blogspot.com.

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