Friday, September 7, 2012

" लोकतंत्र की नाजायज़ संतान है क्या हमारे - मनमोहन सिंह " ????

‎" मनमोहन सिंह ने देश की जनता से कभी प्रधानमंत्री बनाए जाने का जनादेश लिया ही नहीं. यह आज तक के अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी भी लोक सभा का चुनाव ही नहीं लड़ा. संसद में पिछले दरवाजे से घुसाया गया यानी राज्य सभा में भेजा गया और वह भी गौहाटी (असाम ) का फर्जी पता देकर. पूछने पर वहां के लोग बताते हैं कि इस नाम पते शक्ल सूरत का कोई भी सरदार यहाँ कभी नहीं रहा. गुजरे दो महीने से असाम साम्प्रदायिक हिंसा में जल रहा है और वहां से राज्य सभा की नुमाइंदगी करता यह कोंग्रेस का हीरो, जनता का जीरो और देश का नीरो चैन की बंसी बजा रहा है. क्योंकि इसकी जवाबदेही देश की जनता के प्रति नहीं है. इसकी जवाबदेही तो अमेरिका के प्रति है. याद करें परमाणु अप्रसार संधि के मुद्दे पर किस प्रकार इसने अमेरिका की पक्षधरता करते हुए सरकार को भी दांव पर लगा दिया था. यह संसद इस बार राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में लाचार नज़र आयी है. बार-बार लगातार सर्वोच्च न्यायालय या CAG ने ही घोटालों को बेनकाब किया है और हिसाब माँगा है. भारतीय लोकतंत्र संसद में मूर्छित है केवल जन चेतना में धड़क रहा है औ

र जनता किंकर्तव्य क्योंकि सच के सैकड़ों संस्करण और उसकी हमशक्ल साजिशें जनता को एक जुट नहीं होने दे रहीं. ----अमेरिका यही चाहता है और इस काम को बखूबी अंजाम दिया है उसके मुनीम मनमोहन ने.
  अगर यह लड़ाई लोकतंत्र की होती तो अच्छा था...अगर यह लड़ाई जनादेश की होती तो अच्छा था ...अगर यह लड़ाई कोंग्रेस -भाजपा--सपा-वाम--NDA-UPA की होती तब भी अच्छा था...यह लड़ाई हिन्दू -मुसलमान की भी नहीं है. यह लड़ाई तो KGB Vs. CIA है जिसमें जनादेश या हम भारतीय नागरिकों की इच्छा बेमानी है. हमारा प्रधानमंत्री चुनाव जीत कर नहीं आता बल्कि "मेड बाई अमेरिका" आता है. हमारे क़ानून "मेड बाई अमेरिका" आते हैं. हमारा राष्ट्रपति "मेड बाई अमेरिका" होता है. सोनियां इलाज करवाने जाती हैं तो अमेरिका. यह अमरीकी गुर्गे भारत की राजनीति में सेंध फोड़ कर घुस आये हैं चुनाव जीत कर हमारा जनादेश ले कर नहीं आये. एशिया में सोवियत रूस के वर्चस्व को मात देने के लिए अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को गोट बनाया था और भारत को मात देने के लिए मन मोहन सिंह को गोट बनाया है. मन मोहन सिंह भारतीय राजनीति के टेस्ट ट्यूब बेबी होते तो स्वीकार कर लिए जाते...वह भारतीय राजनीतिक पालने मैं पल रही लोकतंत्र की नाजायज संतान हैं. यह अमरीकी वायरस भारतीय राजनीति में जब से घुसे है भारत की राजनीति वायरल फीबर से ग्रस्त है. चूंकि मन मोहन सिंह जनता से सीधे चुन कर तो आये नहीं हैं इस लिए जनता के प्रति जवाबदेह भी नहीं हैं वह अमेरिका के द्वारा भारत पर थोपे गए हैं इस लिए अमेरिका के प्रति जवाब देह हैं और आज की तारीख में हम दरअसल अमेरिका के गुलाम हैं." ----राजीव चतुर्वेदी
      रोजाना पढ़ें :- " 5TH PILLAR CORROUPTION KILLER " लिंक ये है :- www.pitamberduttsharma.blogspot.com.

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