" पत्रकारिता का क - ख - ग " भी नहीं जानते , ये " डिग्री " धारक टीवी एंकर !!!

" विद्या " का ' आशीर्वाद " पाए हुए प्यारे मित्रो , आप सबको सादर नमन !! स्वीकार हो !!
                           पिछले कई वर्षों से टेलिविज़न की दुनिया के चमत्कार देख रहा हूँ !! जब से ये सेट - लाईट  चेनेल चले हैं तब से इन्सान कई बिमारियों ,दुराचारों और कुविचारों से ग्रसित हो चूका है !! क्या बूढ़े , क्या जवान क्या महिलाएं और क्या पुरुष , यंहा तलक की छोटे - छोटे बच्चे भी इसका शिकार हो चुके हैं !! हालांकि सेहत को तंदरुस्त रखने वाले , धार्मिक प्रवचन और सब तरह के सामाजिक और राजनीती को नयी दिशा देने वाले कार्यक्रम भी बनते हैं और दिखाए जाते हैं !! लेकिन इस बहुतायत ने " पाखंडियों " को भी एक सुअवसर प्रदान करने का काम भी किया है !! इंटरनेट के आ जाने के बाद तो जैसे बुरे कामों की बाढ़ सी आ गयी है !! और हम हैं कि अभी तलक छोटे स्तर तलक ही दोष ढूंढ रहे हैं !
                         ना जाने कैसे - कैसे संत - विशेषग्य और पत्रकार पैदा हो गए कि पूछो मत !! देश का बंटा - ढार  कर दिया ससुरों ने !! महिलाएं गन्दी सास - ननद - भोजाई - देवरानी और जेठानी के नाटक देख - देख कर " भ्रष्ट " हो चुकी हैं , युवा नंगे चित्र , चलचित्र देख कर नशेडी और आवारा बन चुका है !! और अधेड़ लोग विभिन्न विषयों पर प्रायोजित समाचार और बहसें देख - सुन कर आलसी हो गए हैं !! पहले दूरदर्शन चेनेल होता था जिसके " रूकावट के लिए खेद है " के सलोगन दिखाए जाने के समय के अंतराल मैं ओरतें और पुरुष अपना आवश्यक काम निपटा आते थे !! रोचक कार्यक्रम के नाम पर सप्ताह में दो फ़िल्में और तीन चित्रहार ही होते थे !! जिनको देखने हेतु लोग अपने पड़ोसियों के घरों में जाकर टीवी देख आते थे !! कंही कोई दिक्कत नहीं होती थी !! अब तो अपने बच्चों के साथ भी टीवी नहीं देखा जा सकता !!!!!


                    लेखकों - निर्देशकों की डिमाण्ड बढ़ जाने के कारन भी " कचरा " जमा हो गया !! प्रदेशों की सरकारों ने शिक्षा का भी निजीकरण कर दिया जिससे उच्च शिक्षा का स्तर भी गिर गया !! सारी  डिग्रियां बहुतायत संख्या मैं बच्चों को मिलने लगी !! सरकारों ने येभी आदेश दे दिया की आठवीं कक्षा तलक कोई बच्चा फेल भी नहीं होगा !! उसपे आरक्षण के कारण कम योग्यता वाले लोग भी वो पद प्राप्त कर गएहैं जिनके लायक उनके पिता जी भी नहीं थे !!
                     इसी का नतीजा है," पत्रकारिता " जैसे " संवेदनशील " काम को ऐसे लोग कर रहे हैं जो पत्रकारिता का ना तो " क - ख - ग " जानते हैं और नाही इस काम के सिद्धान्त और नियमों से ही वाकिफ हैं !! तभी गंभीर विषयों पर एंकर लोग विफल हो जाते हैं !! वे प्रश्न भी स्वयं करते हैं और पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर सत्ता के प्रवक्ता भी बन जाते हैं !! उसपर ये भी कहते हैं की ," हम जैसे हैं सो हैं ,आप इस प्रश्न का उत्तर दीजिये " , ऐसा चर्चा मंडल में बैठे विपक्षी प्रवक्ता को बोलते हैं !! मैं उन्हें दूसरों की तरह बिकाऊ नहीं बल्कि अनपढ़ मानता हूँ !! आपका क्या विचार है कृपया अवश्य बताएं !!
                       
प्रिय बन्धुओ और प्यारी बांध्वियो !!
सादर - सप्रेम नमस्कार !!
हमारे ब्लॉग " फिफ्थ-पिल्लर - कोरप्शन - किल्लर " ( 5th pillar corruption killer ) को आप इस लिंक पर जाकर रोज़ाना पढ़ें , शेयर करें तथा अपने अनमोल कोमेंट्स हमारे ब्लॉग पर जाकर अवश्य लिखें !! क्योंकि आपके कीमती कोमेंट्स ही हमारे लिए " च्यवनप्राश " का काम करते हैं !! आप चाहें तो हमारी कोई भी पोस्ट को आप किसी भी समाचार पत्र में प्रकाशित कर सकते हैं !! हमारे ब्लॉग के सारे लेख आपको हमारी फेस-बुक , गूगल +, पेज और ग्रुप्स में भी मिल जायेंगे !! जो भी मित्र अपने लेख हमारे ब्लॉग में प्रकाशित करवाना चाहें वो हमें इ मेल करें !! pitamberdutt.sharma@gmail.com. हमारे ब्लॉग का लिंक ये है :- www.pitamberduttsharma.blogspot.com. और हमारी फेस-बुक का लिंक ये है :- www.facebook.com/pitamberdutt.sharma.7.
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