Friday, June 22, 2012

" ससुरा भी कभी जँवाई था , बकरा भी कभी कसाई था " !!!!????

" रिश्तों की इज्ज़त करने वाले मित्रो ", लाड भरा नमस्कार स्वीकारें !!
                                वैसे तो भारत में बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जिनसे विश्व आश्चर्य चकित हो कर दांतों तले उंगलियाँ दबा ले जैसे भारतियों का खान - पान , पहनावा , बोल - चाल आदि आदि । लेकिन मैं आपको भारत के एक प्यारे से रिश्ते के बारे में आज बताना चाहता हूँ ! हालाँकि " मुन्नी - एकता कपूर " जी ने मेरे इस रिश्ते की बराबरी वाले रिश्ते पर एक लम्बा सारा नाटक भी बना डाला और उसने भी भारत में एक नया रिकार्ड कायम कर दिया , प्यार से मैं उसे भी आशीर्वचन देता हूँ !!  तो चलिए और ज्यादा आपको इंतजार नहीं करवाता हूँ आपको बता ही देता हूँ , वो रिश्ता है " ससुर व्  जंवाई का और बकरे एवं  कसाई का " !! 
                                      जी हाँ इन दोनों रिश्तों के बारे में जितना कहा और लिखा जाये वो कम ही होगा क्योंकि जब भी ये दोनों एक दुसरे के सामने होते हैं , तभी एक नया वाकया घट जाता है जो की ऐतिहासिक ही होता है !!?? यही एक रिश्ता है जो हर दिन अपनी नयी उचाईयां स्थापित करता है !! क्योंकि ये रोज़ गिरता भी है बिलकुल अपने शेयर - मार्किट की तरह !! इसका भी ग्राफ चाहे नीचे जाए या ऊपर पर इसका क्रेज़ हमेशां कायम रहता है !! दूसरा रिश्ता है , बकरे और कसाई का ये रिश्ता भी सात जन्मों तक अपना हिसाब किताब बारी बारी से बराबर करता है इसी लिए कोई भी बकरा काटने से पहले ज्यादा शोर नहीं करता बस उसी समय जो दर्द होता है उसे ही रोकर बयान करता है !!
                            आप कहेंगे की आज क्या लेकर बैठ गए पीताम्बर जी !! तो मित्रो मैं बिना मतलब के कोई बात नहीं करता हूँ , आज जो भाजपा में माननीय अडवानी जी की हालत है उसे देख करही मुझे उपरोक्त उदहारण याद आ रहे हैं !! और कोई नहीं भाजपा के ही पुराने महामंत्री श्री श्री गोविंदा चार्य जी ने जो सच ब्यान किया है वो माननीय अडवानी जी पर तो लागू होता ही है , लेकिन मज़ा तो इस बात का है की वो मुझे अपने पर भी लागू होता दिखाई दे रहा है ??? 
                              अयोध्या के प्राचीन राम मंदिर के विध्वंस से पहले अडवानी जी को बड़ा ही महत्त्व दिया जाता था !!घटिया भाषा में कान्हें तो एक जंवाई जैसा ??? लेकिन आज देखो तो ..........??? आप सब जानते हो मुझे कुछ ज्यादा लिखने की आवश्यकता नहीं है !!तीस - चालीस साल तक उनका पार्टी ने खूब जूस निकाल कर पिया , अब जब कुछ कार्यकर्त्ता उनके ज्यूस से मोटे - ताज़ा और बलवान बन गए हैं तो अब उनकी किसी को आवश्यकता ही नहीं ??? जिस प्रकार से ज्यूस वाली मशीन के साथ निकले हुए ज्यूस वाला गुद्दा लटक रहा होता है वैसे ही माननीय अडवानी जी और मुझ जैसे कई कार्यकर्त्ता लटक रहे हैं !! मैं भी जब तक पार्टी के आदर्शों को देख कर उसके स्थानीय नेताओं को पार्षद , डायरेक्टर , विधायक , सांसद या मंडल अध्यक्ष या जिलाध्यक्ष बनाता रहा उनका समर्थन करके तो मैं सबको भाता था लेकिन जैसे ही उनके कर्मों को देख कर  मुझ जैसे कार्यकर्ताओं ने उनका विरोध शुरू किया तो वो सब ऐसे इकठ्ठे हो गए जैसे अन्ना जी के विरुद्ध अपनी भारत सरकार ???
                          लग - भग ऐसा ही हाल सब जगह है !! सच हमेशां कड़वा होता है इसी लिए ज्यादातर लोगों को अच्छा नहीं लगता लेकिन फिर भी मुझ जैसे लोग सत्य के बल पर कुछ भी ताकत नहीं होने के बावजूद उन " बाहुबलियों " से भिड जाते हैं नतीजे की परवाह किये बिना !!आपका क्या विचार है ???
                  आज ही लिखिए हमारे ब्लॉग पर जिसका नाम है " 5थ पिल्लर करप्शन किल्लर " इसे खोलने हेतु रोजाना लाग आन करें और उसपर अपने विचार भी लिखें  -: www.pitamberduttsharma.blogspot.com. 
            आज ही ज्वाईन कीजिये !! 
आपका अपना मित्र , पीताम्बर दत्त शर्मा 


जय श्री राम .....! 
                                    

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