" सीखो भारतीय नेताओं !! सोनिया जी से कुछ सीखो " !! ???

" सीखने - सिखाते रहने " वाले मित्रो और देवियों , मास्टर जी वाला बहुत सारा प्यार और नमस्कार स्वीकार कीजिये !! 
                             ये मास्टर जी का प्यार भी बहुत गज़ब का प्यार होता है जी , मुझे ये तो नहीं पता की आपके जीवन में कब - कब , कितना - कितना और किस - किस मास्टर जी ने कैसे - कैसे प्यार प्रकट किया है ??? उससे आपको आनंद मिला हो या दुःख , लेकिन मेरा दावा है की आपको वो प्यार याद अवश्य होगा ??? इसलिए मैं ही अपना तुज़ुरबा बताता हूँ !! मेरे पिता श्री भी अध्यापक रहे हैं , पूरे शहर के अध्यापक - अध्यापिकाएं उनका सन्मान करते थे और हैं , बचपन में वो मुझे जिस - जिस विद्यालय में दाखिल करने जाते वन्ही वो उन मास्टर जी को ये अवश्य कहते की गुरु जी इसका थोडा "ध्यान " रखना जी , सामने वाले गुरु जी कहते की अवश्य ये मेरे ही बच्चों जैसा है इसका तो मैं विशेष ध्यान रखूँगा आप निश्चिन्त हो जाइए !! लेकिन दुसरे ही दिन से मेरा ऐसा ध्यान रख्खा जाता की बस पूछो मत !! सबसे पहले मुझे ही सारे प्रश्नों के उत्तर देने हेतु कहा जाता , सबसे पहले मुझे ही होम वर्क दिखने हेतु कहा जाता !! ओरों को तो हर गलती की मामूली सी दांत या सजा मिलती लेकिन मेरी तो हर बात पर " विशेष पिटाई " होती वो भी विशेष हथियारों से !!मुझे याद है की जब मैं आठवीं कक्षा में पढता था तो मुझे भरी करंट लगा था , जो भी पता करने आये यही बोले की इसका तो दूसरा जनम हुआ है , लड़का मरते - मरते बचा है !! तो मैंने अपनी माता श्री से पूछ ही लिया की माता जी ज़रा मुझे बताइये की अगर मैं मर जाता तो क्या होता , माता डपट कर बोली की बेटा ऐसा नहीं बोलते मारें तेरे दुश्मन !! मैंने फिर पूछा की माता चलो ये तो बताओ की अगर मैं दोबारा जनम लेता तो क्या मुझे दोबारा से पढना पड़ता ??? माँ  बोली हाँ बेटा आदमी को तो साड़ी उम्र कुछ न कुछ सीखना ही होता है !! बल्कि बड़े बुज़ुर्ग तो यंहा तलक कह गए हैं की अगर कोई ज्ञान की बात दुश्मन से भी मिले तो उस से भी हाथ जोड़ कर ज्ञान प्राप्त करना चाहिए !! फिर वो मुझे रोज़ महाभारत की कोई न कोई इस विषय से सम्बंधित रात को सोते समय कहानी सुनाती !! कभी एकलव्य की तो कभी अर्जुन की , कभी कर्ण की तो कभी अभिमन्यु की उन्होंने कैसे और किससे शिक्षा प्राप्त की !! 
                          इसीलिए आज मैं भारत के सभी राजनितिक दलों के नेताओं से ये सादर अपील करना चाहता हूँ की निसंदेह आप सब में बहुत साड़ी खूबियाँ हैं तभी आप देवताओं जैसी जिंदगी व्यतीत कर रहे हो , लेकिन आप श्री मति सोनिया गाँधी के काम करने के तरीके से काफी पीछे हो !!जब से वो राजीव जी से शादी करके भारत में आई हैं तभी से उन्होंने हम जैसे विरोधी लोगों का प्रत्यक्ष - अप्रत्यक्ष रूप से विरोध सहा है ....लेकिन कभी बोली कुछ नहीं हैं ...!!
और जब से वो राजनीती में आयीं हैं तबसे उनके काम करने का एक विशेष तरीका है !! उनकी पार्टी के नेता ही नहीं लेकिन दुसरे सारे दलों के नेता उनके काम के आगे फीके पद जाते हैं !! क्यों ...?????क्या किसी ने सोचा ???
                                     मैं एक छोटा सा उद्धरण देता हूँ आपको उत्तर प्रदेश के चुनावों के बाद उन्होंने दुसरे नेताओं के साथ साथ अपने सुपुत्र राहुल गाँधी को चुप रहने को कहा है और जिस अनुशासन से वो सरे नेता इतनी देर तलक चुप बैठे हैं और बैठे रहेंगे ..वो अपने आप में एक मिसाल है ! जिसे हम अनदेखा नहीं कर सकते !! हमारे नेताओं को तो बस बोलने का मौका मिलना चाहिए , चाहे उन्हें हार मिली हो या जीत , ना उन्हें कोई शर्म महसूस होती है  
बस बोलते चले जाते हैं ....बोलते चले जाते हैं क्यों .?
                    क्यों दोस्तों आपका क्या कहना है इस बारे मैं ....जल्दी से हमारे ब्लॉग को ज्वाईन कीजिये आज ही लोग ओं करके अपने अनमोल विचारों से हमें अवगत अवश्य कर्वैयेगा , जिसका नाम है :- " 5थ पिल्लर करप्शन किल्लर " लिंक है :- www.pitamberduttsharma.blogspot.com. 


                 तो बोलिए जय श्री राम !! आपका अपना दोस्त !! पीताम्बर दत्त शर्मा , मोबाईल नंबर -- +919414657511.   

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