" समरथ को नहीं - दोष गोसाईं."... !!

      सभी समर्थ मित्रों को मेरा " साष्टांग-प्रणाम !!                                      गोस्वामी तुलसीदास जी ने सच ही कहा था , जोआज भी सटीक बैठता है !! कल हमारी गली में एक चोर पकड़ा गया , मोहल्ले के " खाप-पंचायत " टाईप के लोगों ने उसे एक पेड़ के साथ बाँध दिया और क्या बच्चा -क्या जवान लगे सब उसे पीटने । संयोगवश मैं भी अपनी दुकान से घर लोटते वक्त वंहा पंहुचा तो मैंने ये मंज़र देखा !! माजरा समझते हुए जब मैंने उस चोर की शक्ल देखि तो मुझे वो जाना-पहचाना सा लगा , गौर से देखने पर मैं बोला कि ये तो नगर-पिता श्रीमान...............जी का बेटा है !! मेरा इतना कहना था कि सब एकदम दूर हटकर खड़े हो गए !!
                            जो व्यक्ति अबतक उसे 3-4 चांटे रसीद कर चुका था, बोला मैंने भी सबको कहा था भाई साहिब लेकिन किसी ने सुना ही नहीं ...! दूसरा बोला हमें तो अँधेरे में पता ही नहीं चला , पहचाना ही नहीं गया , हांजी ये तो हमारे सेठ जी का ही बेटा है !! तीसरा बोला - मैंने तो कहा था की मारो मत लेकिन पता नहीं कौन लोग दूसरी गलियों के लोग आये थे जो इसकी पिटाई कर गए जी भाई साहिब हमने इन्हें कुछ नहीं कहा..!!जी.....!!
                                                                                                                                     बंधे हुए चोर ने मेरी तरफ अजीब नज़रों से देखा और मैं मुस्कुराया...!! मैंने सबसे कहा कि इसे खोलकर मेरे घर लाओ वंहा बैठकर मामला सुनते हैं !! इतना कहते हुए मैं अपने घर की तरफ चल दिया , पत्नी जी से बोला , पत्नी जी ज़रा 5-7 कप चाय तो बनाना......!! वो बोली ;- हो गए घर आते ही तुम्हारे आर्डर चालू....!! किसकी बरात साथ लाये हो !!                  मैं बोला, पत्नी जी आपके मधुर वचनों से मैं धन्य हो गया......चलो अब चाय भी पिलादो तुम्हारी वाणी जैसी गरमागरम...! तभी सब मोहल्ले वाले घर के अन्दर आ गए तो हमारा प्रेमालाप बंद हुआ , पत्नी जी चाय बनाने में जुट गयी लेकिन कान हमारी ओर ही लगाये हुए थी ! मैं सभी आगुन्तकों से बोला - आइये बैठिये सबलोग ! तब मैंने पूछा..किसके घर में हुई चोरी , शर्मा जी बोले अपने पूनिया जी के घर ये " बबुआ " घुस गया था पड़ोस के वर्मा जी के बच्चों ने इसे देख लिया , पूनिया जी अपनी भतीजी की शादी में जयपुर गए हुए हैं परिवार सहित !! तब ये भाग रहा था तो सबने इसे पकड़ कर बाँध दिया..!! मैं बोला पहले पूछताछ तो करनी थी सीधे मारना शुरू करदिये .....तो रामखिलावन जी बोले हमने तो मारा ही नहीं,कायथ जी बोले काहे झूठ बोल रहे हो वर्मा जी के साथ आपने ही तो सबको शोर मचाकर बुलाया की पकड़ो-पकड़ो चोर -चोर और फिर आपने ही रस्सी से इस प्यारे से मुन्ने को बांधा फिर मारा, हम तो आये ही बाद में थे !!
                           मैं   बोला कि  शोर   मत करिए  ,कुछ  चोरी  तो  नहीं  हुआ न , चाय पीजिये और जाइये , मैं इसे पुलिस स्टेशन छोड़ आउंगा !! जब सब चाय पीकर चले गए तो वो लड़का बोला ..थेंक्यू अंकल !! मैं तो अपनी क्लासमेट से मिलने आया था ! कई दफा वो घर के पीछे बैठे होते हैं ..तो मैं घर के अन्दर चला गया , और पड़ोसियों ने मुझे चोर समझ शोर मचा दिया और सब पीटने लगे !! मैंने उसे समझाया कि बेटा इस तरह चोरी से किसी के घर नहीं घुसते !! उसे गरम-गरम दूध पिलाकर मैंने अपने घर से विदा कर दिया !!
                           बाद  में मैं सोचने लगा कि छोटे - मोटे अपराधियों को तो जनता स्वयं जज बनकर दंड देने लगती है लेकिन बड़े अपराधियों, चोरों के आगे नतमस्तक होने लगती है !!!
                        पाकिस्तान  की विदेश मंत्री श्रीमती हिना जी ने हिंदुस्तान के बड़े चोरों की और " ऊँगली " की है ....!! मैं उनके जज्बे की कद्र करता हूँ और कहता हूँ कि हमें भी पता है मैडम !! लेकिन हमें गोस्वामी तुलसीदास जी गलत पाठ पढ़ा गए हैं...!! इसलिए हम मजबूर हैं !!
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