Thursday, May 23, 2013

" जनता ",!! अभी पता नहीं चला क्या ??

"सूझबूझ वान"सभी पाठकों को मेरा प्रणाम !!
         कल यूपीए सरकार के नो साल पूरे हो गए , इस अवसर पर रात्रि-भोज रख्खा गया ,जनता हेतु नहीं बल्कि उन नेताओं,अफसरों और पत्रकारों हेतु जिन्होंने इस सरकार के नो साल शासन चलाने में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मदद की !!चटखारे ले-ले कर इस भोज का आनन्द सब ने लिया !! जो इस भोज में आया, वो भी चर्चा में रहा, जो नहीं आया वो और ज्यादा चर्चा में रहा !! जैसे मुलायम जी और पूर्व क़ानून मंत्री अश्वनी कुमार जी नहीं पधारे तो लोग एक दुसरे से पूछते रहे कि क्यों नहीं आये ??
          सरदार मनमोहन सिंह जी ने एक बार फिरसे सोनिया-राहुल जी को प्रभावित कर ये कहलवाने में सफलता प्राप्त कर ही ली कि वोही अगले प्रधानमन्त्री होंगे अगर यूपीए की सरकार बनी तो !! ये सफलता उन्हें कैसे मिली ये " देखने " वाली बात है !!क्योंकि बहुत से कांग्रेसी अपना नंबर आने की प्रतीक्षा में थे , चाहे सरदार जी ने कईयों को " घर " भिजवा दिया था , तो भी आशा तो बनी रहती ही है ना इन्सान के मन में !!!!
          " साम्प्रदायिकता "का भूत दिखाकर,जनता को " बेवकूफ " बना कर बीस -तीस सांसद जिताकर सोदेबाज़ी करने में माहिर ये छोटे दलों के "हाईकमांड" भी इस भोज में अपना भविष्य " तलाश " रहे थे !!
भाषण भी बड़े सधे हुए तरीके से दिए गए !प्रधानमन्त्री जी ने आंकड़े गिनाये तो सोनिया जी ने कहा कि हमने मिलकर काम किया , अब हमारे पास छिपाने को कुछ बचा नहीं ...!!!
           मतलब !! देश के भेद सभी को बता दिए गए हैं, सारे खनिज बेच दिए हैं , हमने कमीशन खा लिया है , जनता ने सारे नेताओं को चोर बोल दिया है ...आदि-आदि !!!!! अब कोई " भेद " रहा नहीं इसलिए आप भी खाइये और हमें भी शान्ति से खाने दीजिये ......!! इकिस्वीं सदी आ गयी है अब जनता को भी समझदार बनना चाहिए की नहीं ...??? कलयुग में सतयुग की बात काहे करत हो आप लोग ??? " बैकवर्ड " कन्हीके ....!!
          बी . पी .एल . वाले सस्ता अनाज,दो सो रूपये दिहाड़ी नरेगा के तहत और दो कमरे आदि छोटे लालचों में आकर राज़ी हो जाओ , मध्यम तबके वाले अगर कर्मचारी हैं तो जितनी बड़ी पोस्ट पर हो उतना खा लो, व्यपारी हो तो टेक्स चुरालो और नेता हो तो अपनी पंहुच मुताबिक खालो ...!! ऐश करो !! बस वोट हमें देना ......!!
         
 जब ऐसे हालात हो देश के तो मित्रो सभी देश भक्तों को हमारी देशभक्त सेना से हमें " आह्वान " करना चाहिए कि वो देश हित में अपनी बैरकों से बाहर निकलकर भ्रष्टाचारियों से भारत को मुक्त कराएँ और देश की बागडोर किसी ऐसे एक व्यक्ति के हाथों में सौंप कर जाएँ जो हमारे देश को " इण्डिया से भारत " फिर से बना सके !! 

          ताकि देश एक नए संविधान और नयी व्यवस्था से चल सके और हमारी आगे आने वाली पीढियां "आनन्द " से रह सकें !!
     धिक्कार है !! देश द्रोही नेताओ !!
     ************************
            काश !! ऐसा होता !!??
आप का क्या कहना है मित्रो ,इस विषय पर ...???????

इंटरनेट के सभी माध्यमों पर लिखते - पढ़ते कब 4वर्ष पूरे हो गए पता ही नहीं चला !! आप मेरे ब्लॉग "5th pillar corruption killer"जिसका लिंक ये है :-www.pitamberduttsharma.blogspot.com. को इतना महत्त्व दे रहे हैं कि मैं आप के प्यार में अभिभूत हुआ पाता हूँ अपने आपको !! मैं अपने मित्रों की रचनाएँ भी पसंद आने पर आप सबके संग ब्लॉग के साथ साथ गूगल +,मेरे पेज़, फेसबुक और उसके कई ग्रुप्स में भी शेयर करता हूँ !! जिन्हें आप सेंकडों की गिनती में रोज़ाना पढ़ते है , लाईक करते हैं और अपने अनमोल कोमेन्ट्स भी लिखते हैं !! जिन्हें मैं आपके आशीर्वाद के रूप ग्रहण कर दिशा निर्देश पाता हूँ !! मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आपका प्यार ता उम्र मुझे इसी प्रकार से मिलता रहेगा !!
हम इस अपने ब्लॉग में आन - लाईन चेनेल और न्यूज़ वेबसाइट भी शुरू करना चाहते हैं !! इस कार्य में भागिदार बनने के इच्छुक मित्र हमसे शीघ्र संपर्क करें !
पीताम्बर दत्त शर्मा, हेल्प-लाईन-बिग-बाज़ार , सूरतगढ़ . फोन न. -01509-222768,मो.+919414657511.
आप सबको ढेर सारी शुभकामनाएं !!सदा प्रसन्न रहें !! नए मित्र शीघ्र अपनी फ्रेण्ड-रिक्वेस्ट भेजें !!                    

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल शुक्रवार (24-05-2013) के गर्मी अपने पूरे यौवन पर है...चर्चा मंच-अंकः१२५४ पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  2. सब चोर चोर मौसेरे भाई .... कोई पार्टी आ जाए सत्ता में होना यही है ।

    ReplyDelete

2014 की कॉरपोरेट फंडिग ने बदल दी है देश की सियासत !!

चुनाव की चकाचौंध भरी रंगत 2014 के लोकसभा चुनाव की है। और क्या चुनाव के इस हंगामे के पीछे कारपोरेट का ही पैसा रहा। क्योंकि पहली बार एडीआर न...