Friday, May 10, 2013

"क्रिकेट नहीं , स्तीफे हो गए , ऊ...ला - ला ..! !

सभी मित्रों को मेरी तरफ से " ऊ -ला -ला भई ऊ लाला " ... !!
                 पुराने ज़माने में कभी सर्कस मनोरंजन से भरपूर हुआ करती थीं , फिर फिल्मो ने अपना परचम फहराया तो कभी हाकी -फूटबाल ने , लेकिन जबसे ये ससुरी फैशेनेबल किरकेट आई है पूछो मत जी इसने तो सबको बावला सा कर रख्खा है जी !! गलियाँ - मोहल्ले ,मैदान- बेडरूम सब जगह क्रिकेट ही क्रिकेट नज़र आती है !! राष्ट्रीय खेल का तो अता पता ही नहीं है ! अब तो क्रिकेट बुकियाँ भी खुल गयीं हैं बड़ा व्यापार भी होता है !! एक यही खेल है जिसके प्रबन्धकों को धन कमाने से हमारे खेल मंत्री भी नहीं रोक सकते !! कोई संसद इनके लिए कोई नया क़ानून बनाने की हिम्मत नहीं कर सकती और कोई अदालत इनके ऊपर कोई " टिपणी " नहीं कर रही , क्यों ...???
              हमारे नेता कभी कभी ये सिद्ध कर देते हैं की हम ही सबसे बढ़िया मनोरंजन के साधन हैं !
जब से हमारा भारत आज़ाद हुआ तब से इन " नचनिये - नेताओं " ने अपने "क्रियाकरम " से देश को " इंडिया " बना दिया है !! जिस तरह से क्रिकेट 5 दिवसीय टेस्ट से वनडे मैच ,फिर नाईट मैच और अब " रंगीन 20-20 " मैच में बदलकर " ऊ ऊ - ला - ला " हो गयी है , तो सभी नेताओं ने संसद - सत्र का समय घटाकर " नेताओं की सर्कस " बना दिया है !! जैसे क्रिकेट में दर्शकों की डिमाण्ड पर बैट्समैन चौके - छक्के लगाता है , वैसे ही हमारे प्रधानमंत्री विपक्ष की " डिमाण्ड " ना -नुकुर करके मनोरंजन पूर्ण तरीके से अपने मंत्रियों के स्तीफे दिलवा ही देते हैं !! 
         हमारे प्रधान मंत्री जी बड़े ही कोपरेटिव P.M. सिद्ध हो रहे हैं , " बल्लेबाजी " तो स्वयं कर रहे हैं लेकिन छक्के लगने का श्रेय बिना देर किये राहुल व सोनिया जी को ही दे रहे हैं !! दुनिया से अपने को " मूर्ख " कहलवाकर अपने प्रतिद्वन्दियों को नेस्तनाबूद कर रहे हैं !! इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि वो अगली बार भी P.M. बन जाएँ !! क्योंकि सोनिया जी भी अभी तलक ये तय नहीं कर पायीं हैं की उनका भविष्य में  ज्यादा आज्ञाकारी राहुल प्रियंका होंगे या मनमोहन !! हो सकता है कि मनमोहन सिंह जी बिना चुनाव जीते ज्यादा समय प्रधान मंत्री रहने का रिकार्ड बना जाएँ , वो भी गांधी परिवार से बाहर का !! 

            तभी तो हमने कहा है कि मित्रो , क्रिकेट का खेल से आदमी नहीं बोलता ऊ - ला - ला !! बल्कि नेताओं के " बकरे -पण्डित " वाले सरकसी करतबों से भरपूर तमाशा देखकर ही मुंह से निकलता है कि " उ - ऊ - ला - ला "...!!
             तमाशा ख़तम नहीं हुआ है ..........!!!


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                    क्यों मित्रो !! आपका क्या कहना है ,इस विषय पर...??
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