Wednesday, May 8, 2013

क्यों मित्रो !! आपका क्या कहना है ,इस विषय पर...??

" कुछ फैसले अब हो ही जाएँ तो अच्छा होगा भारत के भविष्य हेतु "..????
           मित्रों, एक कट्टरपंथी पेज इन्डियन मुस्लिम ने लिखा है कि भारत के मुसलमान वंदेमातरम् का गान नही करेंगे क्योंकि इसमें मातृभूमि का शुक्रिया अदा किया गया है और मुसलमान सिर्फ अल्लाह का ही शुक्रिया अदा करते हैं |

मित्रों, आज़ादी के बाद जब केन्द्र सरकार ने राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान चुनने के लिए एक समिति बनाई तो उसमें चार मुसलमान भी थे .. मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, रफी अहमद किदवई, जाकिर हुसैन, ए.एस रहमान .. इनमें से किसी ने भी ये नही कहा कि वंदेमातरम् को मुसलमान नही गायेंगे .. जबकि मौलाना आज़ाद तो जाने माने इस्लामिक विद्वान थे |

असल में कांग्रेस की शह पर पिछले १० सालों से इस देश में ये हवा चलाई गयी है कि वंदेमातरम् इस्लाम विरोधी है .. मैंने इस बारे में अपने कुछ इस्लाम के जानकर लोगों से बात की तो उन्होंने कहा कि कुरान में साफ लिखा है कि हर मोमिन को अपनी धरती के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए क्योंकि धरती ने ही उसे खाना दिया है .. कुरान के हिसाब से वंदेमातरम् का गान कहीं से भी गलत नहीं है |

मित्रों, इसके पीछे मुस्लिम जमातों में होने वाली मुल्लों की अलगाववादी तकरीरे जिम्मेदार हैं.. इनकी जमातो में पाकिस्तान, अरब और बांग्लादेश के मुल्ले भी आते हैं और सरकार इनको वीजा भी देती है .. और ये मुल्ले आकर मुस्लिम युवकों का ब्रेनवाश करके उनके अंदर कट्टरता भर देते हैं |

आज़ादी के लड़ाई में हिन्दू, मुस्लिम सब वंदेमातरम् गाते थे .. असफाक उल्लाह खा वंदेमातरम् का उद्घोष करते हुए फांसी पर चढ़े ..तो क्या मुस्लिम उनको मुसलमान नही मानते हैं ?

विश्व के आठ कट्टर मुस्लिम देशों के राष्ट्रगान में मातृभूमि का वर्णन है ... इंडोनेशिया और ब्रूनेई के राष्ट्रगान के बाद धरती को चूमना पड़ता है | फिर भारत के ये मुसलमानों के लिए इस्लाम की परिभाषा अलग है क्या ?

असल में परेशानी ये है कि इस्लाम की व्याख्या हर एक कठमुल्ला अपने हिसाब से करता है.. भारत में जितने भी कठमुल्ले हैं, उनकी किसी भी मसले पर अलग- अलग राय होती है .. कई बार तो ये ईद किस दिन मनाई जाये उस पर भी एक राय नही हो पाते ..
                                         लोकसभा में बुधवार को वंदे मातरम के अपमान मामले पर बीएसपी सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने ऐसा बहाना दिया है जिससे विवाद खड़ा हो गया है. उन्होंने कहा कि इस्लाम के खिलाफ है वंदे मातरम इसलिए वह लोकसभा छोड़कर चले गए थे.
बीएसपी सांसद ने कहा, ‘यह हमारे धर्म के खिलाफ है, इसलिए अगर भविष्य में भी ऐसी स्थिति आई तो मैं वही करूंगा, जो आज किया है. जहां तक देश की आन-बान की बात है तो मैं इसके लिए अपनी जान भी कुर्बान करने को तैयार हूं.’

गौरतलब है क‌ि इससे पहले मीडिया रिपोर्ट्स में आया था कि बीएसपी सांसद पेट खराब होने की वजह से सदन से बाहर गए थे.

लोकसभा में बुधवार को बजट सत्र की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित किए जाने से पहले बीएसपी सांसद राष्ट्रगीत वंदे मातरम का वाकआउट करके चले गए.

इस पर लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कडी़ आपत्ति जताई थी और बीएसपी सांसद को भविष्य में ऐसा दोबारा नहीं करने की हिदायत दी थी. लोकसभा में बुधवार को 12 बजे दोबारा सदन की कार्यवाही शुरु हुई तो हंगामा शुरु हो गया था. इस बीच मीरा कुमार ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाये और अध्यक्ष के आसन के समीप नारेबाजी कर रहे सदस्यों से अपनी सीटों पर जाने का अनुरोध किया.

सदन में शोर शराबा रुकने पर उन्होंने सदस्यों से राष्ट्रगीत के लिए खडे़ होने को कहा. राष्ट्रगीत की धुन शुरू होते ही बीएसपी सांसद सदन से उठ कर चले गए.

राष्ट्रगीत की धुन पूरी होने के बाद अध्यक्ष ने नाराजगी जताते हुए कहा कि राष्ट्रगीत के दौरान एक सदस्य सदन से चले गए. यह बहुत गंभीर मामला है. उन्होंने कहा कि वह जानना चाहती हैं कि ऐसा क्यों हुआ और भविष्य में ऐसा कतई नहीं होना चाहिए?

                                      क्यों मित्रो !! आपका क्या कहना है ,इस विषय पर...??
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4 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल शुक्रवार (10-05-2013) के "मेरी विवशता" (चर्चा मंच-1240) पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. वाकई ये गंभीर मामला है लेकिन तुस्टीकरण के इस दौर में कोई इसको गंभीर भी मानेगा क्या यही सबसे बड़ा सवाल है !!

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