" राजनितिक दलों के संगठन , कातिल या पालनहार " ....???

राजनीति में रूचि रखने वाले मेरे सभी मित्रो , घायल सलाम कबूल फरमाएं जी !!
                          कल देश के दो बड़े राजनितिक दलों की राजस्थान शाखा से दिल तोड़ देने वाले समाचार एक साथ आये !! जीवन में सुख के क्षण भी आते हैं और दुःख के प्रकृति का नियम है ये , लेकिन अगर दुःख को आवाज़ देकर बुलाया जाए तो उसे एक हिंदी के मुहावरे के मुताबिक यही कहते हैं की " अपने ही पाँव पर कुल्हाड़ी मारना " !! 
                           हुआ यूं की राजस्थान के कांग्रेस  प्रदेशाध्यक्ष चंद्रभान जी संगठन की एक मीटिंग ले रहे थे और कार्यकर्ताओं की बात नहीं समझ पाए या समझना ही नहीं चाहते थे ?? इसलिए उन्ही के सामने कार्यकर्ताओं ने वो सब कुछ कर दिया जो अशोभनीय मन जाता है !! किसी जिलाध्यक्ष तक के कपडे तार - तार हो गए और सभ्यता भी शरमसार हो गयी !

                      दूसरी घटना भाजपा के प्रादेशिक कार्यालय में हुई जिसमे भाजपा की कोर कमिटी की एक मीटिंग हो रही थी जिसमे भाजपाके तीन बड़े नेता गुलाब जी कटारिया , श्रीमती किरण जी महेश्वरी और पूर्व मुख्यमंत्री श्री मति वसुंधरा राजे जी किसी बात को लेकर इतने खिन्न हो गए की बाहर आकर दो जानो को तो त्याग -पात्र देने की घोषणा करनी पड़ी और कटारिया जी ने अपनी यात्रा को रद्द कर दिया !! अब सवाल ये पैदा होता है की कौन है वो जो पीछे से इन सबको शाह दे रहा था ??? और वोही हो गया जो वो चाहता था .....यानी पार्टी का बंटाधार ......!!!! क्या संगठन है वो जो नहीं चाहता की कोई भी ज़मीं से जुदा नेता इतना आगे न आनेपाए की वो संगठन को ही चेलेंज करने लग जाए !!!! उदाहरण के लिए ....मदन लाल खुराना , कल्याण सिंह , सुश्री उमाभारती जी और यंहा तक की अटल जी और अडवानी जी तक भी नहीं बच पाए इस संगठन की मार से !! तर्क यही दिया जाता है की ये नेता संगठन की सुनते ही नहीं है ???? आखिर संगठन चाहता क्या है स्पष्ट क्यों नहीं करता ??? मेरी जानकारी के मुताबिक वसुंधरा जी के खिलाफ तो योजना तभी से बननी शुरू हो गयी थी जब उन्हें मुख्यमंत्री बने मात्र सात महीने ही हुए थे !! पहले ॐ परकाश माथुर जी को उनके खिलाफ लगाया गया , फिर डॉ. महेश शर्मा जी को भेजा गया लेकिन वो दोनों ही वसुंधरा जी के भगत हो गए तो फिर संगठन ने तब के संगठन मंत्री श्री प्रकाशजी भाई साहिब को लगाया की वो कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों को वसुंधरा से अलग करें ताकि जनता में उनका प्रभाव कम किया जा सके !! लेकिन वसुंधरा जी का प्रभाव बढ़ता ही चला गया ...!! और कोई नेता होता तो वो आज से दस साल पहले ही त्याग - पात्र दे देता लेकिन वसुंधरा जी ने त्याग पात्र का तीर बड़े ही सही समय पर चलाया है !! ज्यादा तर सम्भावना यही है की सबको मना लिया जाएगा !! लेकिन संगठन ऐसा करता ही क्यों है ???? वो जो चाहता है स्पष्ट क्यों नहीं बताता सोचिये आप भी और संगठन वाले भी ...!!! क्या मिलता है उसे अपने ही पेरों पर कुल्हाड़ी मार कर !! ऐसे ही जिला स्तर पर हो रहा है और ऐसा ही मंडल स्तर पर हो रहा है !! निराशा बढती ही जा रही है !! कैसे हम अपनी पार्टी को 2014. में जीता पाएंगे ??? कैसे आप ही बताइए मित्रो ....लाग आन करें हमारा ब्लाग और ग्रुप जिसका नाम है " 5th pillar corrouption killer " अपने विचारों से हमें अवश्य अवगत करवाएं !! धन्यवाद !! अगर जल्दी सब ठीक नहीं हुआ तो पार्टी का बंटाधार निश्चित है !! 

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