" लस्सी और चाय की लड़ाई "

इस गर्मी के मौसम में , लस्सी और चाय का भरपूर आनंद उठाने वाले दोस्तों , मीठा - नमकीन नमस्कार स्वीकारें !! 
         आज मैं आपको एक कविता पढ़ाने जा रहा हूँ जो लिखी तो पंजाबी में गयी है !!लेकिन क्योंकि पंजाबी आप सब मित्रों से पढ़ी नहीं जायेगी , इसलिए हिंदी में पंजाबी लिख रहा हूँ !! शीर्षक है :- 
             " लस्सी - ते - चाह "
   लस्सी आखे चाह नू ,
                 मैं सोहनी , मैं गोरी - गोरी ,
                      तूं - काली - कल्वट्टी !
                  मैं निंदर दा  सुख - सुनओढ आ ,
                      तूं जगरातों - पट्टी !
    जिस वेले मैं चायीं - चायीं , छन्ने अन्दर छलका,
    केह्डा साम्भे मेरियां लिश्का, कौन संभाले ढलकाँ!
     रँग मेरा मख्खन वरगा ,रूप वी मेरा सौणा !
     दुध - मलाई माँ - पे मेरे , मेरा असला उच्चा ! जेहडा मेनू रिड्कन बैठे , ओस्तों वारी जांवा !
       खड़के ढ़ोल मधानी वाला , मैं विच भंगडे पावां    मैं लोकां दी सेहत बनावां ,तूं पाई सेहत विगाड़े   मैं पई ठंड कलेजे पान्वा ,तूं पई सीना साड़े !!
             चाह कहंदी ............?
     पै गई एं नी माई बग्गो , मेरे मगर धिगाने ,
   मेरियां  सुड कियाँ भरदे जिह्ड़े , ओ ही लोग सियाने ,
      मेरा हुस्न पिछा नन जेह्ड़े ,दिल मैं उन्ना दे ढमाँ !!
     मेरा रंग कलिखन ,उसते लैला वर्गी लग्गा ,
पिंडे दी मैं पीड़ गवावाँ ,जदों थ्केवें भौरां ,
   ठरयाँ ते चुसयाँ नु मैं , मिठियाँ कराँ टकोराँ !
    तूं ऐ खंग - ज़ुकाम ते नजला , की मैं गिन - गिन दस्सां !!
  मेरे निघ्घे घुट  उतारण चढ़ीयाँ होइयाँ कस्सां ,            तूं कज्जी रहो कुज्जे दे अन्दर ,तेनु की तक्लीफा !!
   जे मैं सोह्नियाँ मेजां उत्ते रख्खां पई तशरीफां !!
           अग्गों लस्सी कहंदी है .....?? 
   अपनी जात कुडतन होवे , मिश्री नाल न लड़िये !
   नी कल्मुहिये ,कौडिये ,तत्तिये भेडिये नखरे सडिये ! ना कोई सीरत , ना कोई सूरत , ना मुंह - ना मथ्था !!
  तूं ताँ  इंज जापें जिवें जिन्न कोई पहाड़ों लथ्था !
       मेनू पुछ हकीकत अपनी , बंनी  फ़िरें तू रानी ?
  शूं - शूं करदा , हौके भरदा , कोड़ा तत्ता - पानी !!
   ते भुख -तरेह दी दुश्मन - बैरन ,की तेरी मल्याई !
   बंदियां दी तूं चर्बी खोरें , नाल करें वडीयाई ???
  तेरा चोइया ढहके , जिहड़े कपड़े नु तरकावें ??
     सालम गाची - साबण घस जाए , दाग न तेरा जाये 
                      चाय की जवाब देंदी है ???
       नि जा ,क्यों मेरे सर भांडे भन्ने , लै हुन मेरी वारी 
      तेरियां वी करतूतां जाने , वसदी दुनिया सारी ?
    तेन्नु पीन दे लई , जे भांडे दे विच पाइए ,
       थिन्दा हो जाए भांडा नाले , मुश्क ना उसदा जावे  
    


                           कैसी लगी ........अवश्य बताएं जी !

Comments

  1. KHUBSURAT PARIKALPANA SANG TULANA AUR SAUNDARY WARANAN. KYA KAHANE,LAAJAWAB.

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