Tuesday, April 10, 2012

" किस्तों में दोस्ती - किस्तों में दुश्मनी ", हम हैं हिन्दुस्तानी ...!!

किस्तों में सस्ते की बजाय महंगा  सामान खरीदने - बेचने और नाटक फिल्म देखने वाले सभी मित्रों को मेरा हार्दिक डेली सोप वाला नमस्कार ............!! कृपया फुल T.R.P.सहित स्वीकार करें ....!!
                                     जब से हमारा देश अंग्रेजों और तबके भारतीय नेताओं की वजह से , दो टुकड़ों मे बंट कर आज़ाद हुआ है तभी से हम अपने छोटे भाई से न तो ढंग से दुश्मनी निभा पा रहे हैं और नाही दोस्ती !! क्योंकि हमारे तब से लेकर आज तक के नेता कभी भी एक निति पर नहीं चल सके , वो चाहे इंदिरा जी हों या मोरार जी भाई देसाई , अटल जी हों या श्री नरसिम्हा राव जी , सबके सलाहकार " दोगले " ही रहे  ....??? क्योंकि इन्ही सलाहकारों की वजह से ही हम जीती हुई बाज़ी भी हार गए ...!! चाहे वो शिमला समझोता हो या ....आतंकवाद की निति ..सब गुड- गोबर कर दिया इन बुद्धिजीवियों ने ।। नेता भी बराबर के दोषी हैं जो न तो ढंग से सख्ती दिखा पाए और न ही ढंग से प्रेम !! बंटवारे के समय और बाद में भी न जाने कितनी बार हमने पाकिस्तान को पैसा भी दिया है जिसको कभी तर्क संगत नहीं माना गया ..!! महात्मा गांधी जी के कत्ल में एक ये कारण भी मुख्य  था !!
                                  कभी बेनजीर आयीं तो कभी मुशर्रफ , कभी जरदारी आये तो कभी गिलानी ......नतीजा.......सिर्फ धुंधली सी एक किरण मात्र और कुछ भी नहीं !! फिर कोई ऐसी घटना घटती है की तलवारें निकल आती हैं ...!! वन्ही हम पाकिस्तानी नेताओं की भूमिकाओं की तरफ देखें तो हम पायेंगे की न सिर्फ वो हमसे बल्कि सब देशों से वो पैसा भी ऐंठ लेते हैं और आज तलक हमसे दुश्मनी भी निभाते आ रहे हैं ....चाहे वो काश्मीर हो या पंजाब , बंगला देश हो या अफगानिस्तान , सब जगह हमें जो भी नुकसान हुआ है उसमे पाकिस्तानियों का हाथ अवश्य पाया गया है !!
                                 जनता हर समस्या का निर्णय चाहती है चाहे वो कष्टदायक हो या प्रसन्नतादायक ..परन्तु ढीला - ढाला तो बिलकुल भी नहीं क्यों ....क्या मैंने गलत कहा ....नहीं ना ...?? दोस्ती निभानी है तो दोस्ती निभाओ चाहे जो कुछ भी देना पड़े दोस्ती की खातिर देदो !! चाहे पूरा भारत दे कर फिर से वृहिद भारत बनादो और एक की बजाय इस देश के दो प्रधान - मंत्री , दो संसद और एक संविधान ही क्यों न बना ना पड़े ....हमें यानी जनता को सब मंज़ूर है  !! और अगर दुश्मनी का निर्णय होता है तो देखि जायेगी चाहे परमाणु बम्ब चलें या कोई और लेकिन फैसला करके हम हटें ....ऐसे नहीं !!??? 
                                   जो संसद के हमले में , नक्सलियों के नरसंघार में,या फिर किसी भी और आतंकवादी हमले में शहीद हुए हैं उनकी आत्माएं आज हमारे नेताओं और बुध्धिजीवियों के गलत निर्णयों से तड़प रही हैं  ....!! 


                             क्यों मित्रो आपका क्या कहना है इसके बारे मैं , कृपया आप अपने विचार हमारे ब्लॉग " 5TH PILLAR CORROUPTION KILLER " में जाकर अवश्य लिखें !! आज ही लाग आन करें www.pitamberduttsharma.blogspot.com. हमारे विचार आपको बढ़िया लगे हों तो कृपया अपने सभी मित्रों के साथ अवश्य " शेयर " करें , ताकि आपके अनमोल विचारों को हम सहेज कर रख सकें !! धन्यवाद !!  

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