" भस्मासुर - कांग्रेस ने , मार डाला - हाँ मार डाला "..!!??

" मार सहने वाले "सभी सहनशील मित्रों को मेरा सब्र भरा नमस्कार !!
                             मारने वाले से बचने वाला बड़ा होता है लेकिन मार सहने वाला भी बहादुर होता है ! मार भी कई प्रकार की होती है ! कुछ मारें तो ऐसी होती हैं जो कुछ समय तक ही दर्द देती हैं और कुछ तो सारि उम्र तक याद रहती हैं !! कई तो पीढ़ियों तलक नहीं भूलतीं ...??? जैसे 1984 के देल्ली सिख दंगे , गुजरात के 2002 वाले  दंगे आदि आदि ! मैं भी एक बड़ा लेखक हूँ और सेकुलर हूँ इस लिए मैं यंहा बिलकुल नहीं लिखूंगा की ये दंगे क्यों हुए किन क्रिया - कलापों की प्रतिक्रिया थीं ये दंगे !! मैं सिर्फ ये ही कहूँगा की इन दंगों में जो " निर्दोष " मारे गए उनके कातिलों में एक नाम केंद्र सरकार के कहने पर चलने के आरोपों से घिरी सरकारी संस्था सी.बी.आई. ने लिया है अदालत में ....और वो नाम है देल्ली के हरदिल अजीज नेता श्री सज्जन कुमार जी का !! 
                               इस से कुछ घंटे बाद इसी कांग्रेस ने अपने प्रवक्ता श्री अभिषेक मनु सिंघवी जी का स्तीफा भी ले लिया जिनके खिलाफ न तो प्रिंट मिडिया और ना ही इलेक्ट्रोनिक मिडिया बोल्रह था ...???यंहा तलक की विपक्ष भी अजीब सी चुप्पी साधे हुए बैठा था !! सिंघवी साहिब ने तो बड़ी ही चतुराई से अपने वकील मित्रों की मदद से सब सेट कर ही लिया था तो फिर कांग्रेस को क्या हुआ जो उनसे स्तीफा मांगने लगी ??? इस से पहले भी कांग्रेस अपने ही कितने " बच्चों " को खा चुकी है ....." भस्मासुर " की तरह !! क्यों ....कौन है वो जो धीरे - धीरे कांग्रेस को ख़त्म करना चाहता है ???
                         कई बार तो सारे राजनितिक दलों पर मुझे शक होने लगता है , की जिस प्रकार के ये दिखाई देते है उस प्रकार के हैं नहीं ....मसलन कांग्रेस , लालू मुलायम अपने आपको मुसमानो का हितेषी दिखाते हैं अवश्य लेकिन वास्तविकता में हैं नहीं ...! हाँ पैसे अवश्य दे दिए होंगे लेकिन ज्यदा काम हिन्दुओं का इन्होने ही किया है जैसे ....राम मंदिर के ताले खुलवाना , उसमे पूजा शुरू करवाना , राम नवमी की छुट्टी घोषित करना और मस्जिद तुडवाने में किनका हाथ था या किसने निर्णय लिया ....जवाब होगा इन्होने ही .....भाजपा ने नहीं ...!!
                     इसी तरह से बाकी के राजनितिक दलों का इतिहास अगर हम देखेंगे तो पता चलेगा की सब केंद्रीय स्तर के नेता जो करते हैं वैसे दिखाई नहीं देते और जो दिखाई देते हैं वैसे कार्य करते नहीं ..क्यों ???? ऐसे लोगों की चर्चा करना ही हमें त्यागना होगा ...मरे हुए साँपों को गले से उतार फैंकना होगा , इनको देखने जाना , इनका स्वागत करना , इनका भाषण सुनना और इन्हें वोट देना सब त्यागना होगा धर्म,जाती ,इलाके और पार्टियों की बेड़ियों को तोड़ कर हम में से कोई सच्चा , इमानदार , मेहनती , पढ़ा - लिखा और समाजसेवी व्यक्ति चुनना होगा और फिर उसे आग्रह करना होगा की आप चुनाव लड़िये हम आपको जिताएंगे ....!! अगर इस तरह से हम कर पाए सभी नहीं अगर 40% ही ऐसे स्वच्छ छवि वाले नेताओं को हम संसद में भेज पाए तो देश अवश्य नव क्रान्ति की और बढेगा !! 
                         आप बताइए की आपका क्या कहना है जी ......अपने अनमोल विचारों को आप हमारे ब्लॉग और ग्रुप , जिसका नाम है :- "5TH PILLAR CORROUPTION KILLER " में जाकर टाईप करें !! लाग आन करें :- www.pitamberduttsharma.blogspot.com. 


                 ताकि हम आपके विचारों को भी हमारे पास सहेज कर रख सकें !! अंत में आपके लिए एक प्रशन ....क्या सभी राजनितिक दलों को दुबारा से अपना गठन नहीं करना चाहिए ....???? दोबारा से अपना संविधान बनाएं ...दोबारा से अपने सदस्य बनाएं ...ताकि बार - बार पार्टियों को भस्मासुर ना बनना पड़े ..!! ...बोलो राम नाम ......सत्य है !! 

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