Monday, April 16, 2012

" कौन है वो ? जो हमें भारतीय के बजाय , मराठी,बिहारी,पंजाबी,मद्रासी और गुजरतीआदिबोल के आपस में लडवा रहा है ?

सभी भारतीय मित्रों को मेरा तहे दिल से नमस्कार !! कृपया स्वीकार कीजिये ..!!
             हम हैं भारतीय नागरिक , हमारी पहचान ही ये है की हमारी भाषा, वेश-भूषा,खान-पान और पहनावा भले ही अलग हो परन्तु देश हमारा एक है जिसका नाम है भारत - हिंदुस्तान और इंडिया..!! ये वो देश है जिसे दुनिया " सोने की चिड़िया " के नाम से भी जानते थे !! संसार के कई भागों से लुटेरे समय - समय पर आते रहे और हमें लूट कर व हम पर राज करके जाते रहे ..! ये इतिहास तो सारे जानते ही हैं । सभी ये भी जानते हैं की हमारा धरम चाहे कोई सा भी हो,लेकिन इस धरती को हम अपनी माता के समान मानते हैं ! 
              हमारे नेता आजसे पहले कई तरीकों से गन्दी राजनीती करते थे लेकिन भारत - माता के नाम पर सभी राजनितिक दलों के नेता एक हो जाया करते थे ! लेकिन पिछले कुछ समय से मैंने ये महसूस किया है की अब देश को बाहर के दुश्मनों से इतना खतरा नहीं है जितना देश के भीतर बैठे दुश्मनों से हो गया है ! कभी शिव सेना वाले कहते हैं की मराठी - मानुष के इलावा महाराष्ट्र में किसी को नहीं रहने देंगे तो कभी कांग्रेस की श्री मति शीला जी कहती हैं की दिल्ली में बाहरी लोगों की वजह से अपराध बढे हैं ?? किसी ने तो ये भी कहा कीहमारे प्रदेश में आने हेतु " वीजा " लेना पड़ेगा ..ये सुन कर मेरी छाती पर सांप लोट गए ! जी में आया की इस देश की कमान मेरे हाथ में हो और मैं ऐसे सारे ..." जमूरों " को ठीक करदूं !!
                ऐसी वाहयत बातें करने वालों के खिलाफ इस देश में कोई कानून नहीं है , जो इस देश के कभी आरक्षण , कभी जातिवाद और कभी प्रदेशिक स्तर पर बाँट कर अपने वोट बेंक को पक्का करना चाहते हैं ?? कभी - कभी तो यही महसूस होता है की भारत में छोटे - मोटे अपराधियों हेतु एक अलग कानून है और बड़े "अपराधियों " हेतु मात्र दिखावे हेतु क़ानून है ?? हर चीज़ में राजनीति हो रही है हर काम को वोटों से टोला जा रहा है और हर काम से चोरी करने की योजनायें बनाई जा रही हैं तो इस देश का " राम - नाम - सत्य " तो होना ही है !!

           अभी देश के सभी मुख्यमंत्रियों की एक आवश्यक बैठक सरदार मनमोहन सिघ जी ने बुलाई जो सोभाग्य से हमारे प्रधान मंत्री हैं , उस से भी बड़े सोभाग्य की बात ये है की श्री मान पी.चिदम्बरम जी हमारे गृह -मंत्री जी बने हुए हैं ।लेकिन अब मुझे,ये इनका इन पदों पर होना,हमारा दुर्भाग्य ही नज़र आता है । क्योंकि किस ने मीटिंग में क्या बोलना है वो सब पहले ही प्रेस को और जनता को पता था , जबकि इतने महत्व पूर्ण विषय पर बैठक हो रही थी ।इसे तो सीक्रेट रखा जाना चाहिए था !! इसी लिए एक बड़े ही काम की बैठक , बच्चों का हुडदंग बन कर रह गयी !कोई कहता है , प्रदेश में मेरा शासन है केंद्र क्यों अड़चन करे , तो केंद्र कहता है की हमें जब पूरे भारत की सरकार कहा जाता है तो राज भी हम सारे भारत पर करेंगे !! हद तो तब हो जाती है जब एक पार्टी का सांसद पब्लिक जलसे में कहता है की " हम जो पैसा इस सरकार को भेजते हैं , उसे इस प्रदेश का मुख्यमंत्री अपनी मर्ज़ी से खर्च कर देता है " ....आदि आदि । कोई इनसे पूछने वाला नहीं की पैसा तो बेचारी जनता का होता है जो अलग - अलग टेक्स चूका कर सरकार को देती है इनको तो हमने देख रेख हेतु चुनते हैं और ये हमारे धन को अपना ही बना लेते हैं , शायद इसी लिए लगभग हर नेता बिना कोई काम करे करोड़ों कमा लेता है कैसे ....पता नहीं ????? अगर पता चल जाए तो हम भी नेता ना बन जाएँ .....???? हम क्यों ऐसे लेख लिखते फिरें ....??? क्यों मित्रो , आपका क्या कहना है ....??? जो भी आप कहना चाहें , वो आप हमारे ब्लॉग " 5th pillar coorouption killer " पर जाकर इस लेख के निचे लिखे कमेंट्स पर क्लिक करके लिखें , ताकि हम भी आपके विचारों को अपने पास सहेज कर रखें !! तो आज ही लाग आन करें :- www.pitamberduttsharma.blogspot.com. 

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