" बज़ट - मेरे घर का - हमेशां घाटे में रहता है "..??

सभी हिसाबी - किताबी मित्रों को मेरा नाप - टोल कर नमस्कार !! क्योंकि आजकल मार्च का महिना चल रहा है । सारे व्यपारी , नेता गृहणियां और घर का काम करने वाले मेरे जैसे बेरोजगार लोग अपना - अपना बज़ात बनाने में व्यस्त जो रहते हैं । व्यापारी अपने व्यापार का हिसाब - किताब को अंतिम रूप देते हैं की किसको कितना देना है किससे कितना लेना है और कितनी साल भर में व्यापार करने से बचत हुई ये देखता है व्यापारी !! गृहणियां और मेरे जैसे बेरोजगार लोग घर का बज़ात बनाते हैं की इस साल हमें कौन सा सामान सारे साल हेतु एकसाथ खरीदना है और कौन सा हर रोज़ खरीदना है ??? किसको साईकल दिलानी है और किसको कालेज में दाखिला दिलाना है , किसके कपडे सिलवाने हैं तो किसको बूट दिलवाने हैं ??? यही सोचने का विषय रहता है पूरी मार्च में । " बज़ट - मेरे घर का - हमेशां घाटे में रहता है "..?? न जाने क्यों ??? तीसरे हमारे देश के नेता ये भी मार्च के महीने में बहुत व्यस्त रहते हैं , देश के बज़ट हेतु विचार विमर्श करने में । वैसे तो ये शुद्ध वित्त - मंत्रालय का कार्य होता है , लेकिन प्रधानमंत्री की आड़ में बड़े व्यपारी यानी " कार्पोरेट्स घरानों " और हाई - कमांड यानी ...मैडम जी का भी बज़ात बनाने में पूरा सहयोग होता है !! सब मिलकर यही सोचते हैं की किस व्यापारी ने हमें चुनावों में ज्यादा चंदा दिया है उसके उत्पादों पर कम टेक्स लगाया जाए , किस चेनल के पत्रकारों ने हमारा फुल प्रचार किया है उसके लिए किस प्रकार से फायदा पंहुचाने वाला कार्य किया जाए । कुछ वस्तुएं बज़ात से पहले ही मंहगी करदो और कुछ बाद में .... !! निर्माण कार्य ज्यादा घोषित किये जाएँ जिस से ठेकेदार इन नेताओं को ज्यादा कमीशन  दे  सके !! जनता के बारे में सोचने हेतु ज्यादा समय किसी के पास नहीं होता ...!! हाँ जनता के नाम पर अपनी पार्टी को फायदा ज्यादा पंहुचाने हेतु ब्यान जरूर देते हैं ये नेता लोग !!!??? देश का बज़ट भी हमेशा घाटे में ही रहता है -----लेकिन घर के बजट और देश के बजट में इतना अंतर होता है की घर का बजट घर की जरूरतें भी पूरी नहीं कर पाता , अनथक प्रयास करने के बावजूद ....!!! और देश का बजट घाटे के बावजूद हमारे नेताओं को बिना कोई काम किये करोड़ पति बना जाता है बिना किसी ज्यादा प्रयास के ......क्यों और कैसे .....???? ये सोचनीय विषय है !!!!!!!! अफसर - नेता - पत्रकार और ठेकेदार चारों को अगर मिक्सी में डालकर मिला दिया जाए तो बनता है ....." माफिया " और माफिया का होता है एक " डIन " जिसके इशारे पर होते हैं ऐसे बड़े - बड़े काम जिनको अगर कानूनी रूप से करवाना हो तो लग जाते हैं कई साल .....??? इसी लिए आम जनता भी देती है रिश्वत , भागती है इन सफ़ेद वस्त्र धारी बदमाशों के पीछे - पीछे और फिर इनसे छुटकारा पाने की चाहत में करती है " मतदान " भी !! लेकिन फिरभी ये बदमाश लोग निर्दलीय लोगों को मंत्री पद का लालच देकर अपनी सरकार बना लेते हैं क्यों ....??? जैसे उत्तराखंड में जनता ने किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं दिया तो वंहा क्यों राष्ट्रपति - शासन नहीं लगाया जाता क्यों भरष्टाचार का मौका दिया जा रहा है ??????????????????????????????????? आप ही बताइये न ..........सिर्फ " लाइक " करके मत निकल जाइये ....जनाब !! अपने अनमोल विचार भी हमारे ब्लॉग या ग्रुप पर जाकर लिखिए ...जिसका नाम है " 5TH PILLAR CORROUPTION KILLER " इस पर जाइये और लाग आन करिए www.pitamberduttsharma.blogspot.com. इसके " फालोअर " बने और आज ही जोइन करें !! अगर पसंद आये तो अपने मित्रों से भी " शेयर " करे !! धन्यवाद !! मेरा पता और मेरा मोबाईल नंबर मेरी प्रोफाइल में देखें !!

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